इस तपस्या से ही हो रहा है विराट संघठन निर्माण!!
आज नागपुर पहुंचा। आगामी 4..5 जून को स्वदेशी की राष्ट्रीय परिषद यहां होने वाली है। उसकी व्यवस्था हेतु बैठक थी।
स्वाभविक रूप से रेशम बाग भी जाना हुआ, जहां तृतीय वर्ष का संघ शिक्षा वर्ग लगा हुआ है।
मैंने पूछा “कुल संख्या कितनी है?”
“735 शिक्षार्थी, 91 शिक्षक आए हैं 80 प्रबंधक है। कुछ नए बंधुओं की जानकारी हेतु यह सभी शिक्षार्थी ही नहीं प्रबंधक व शिक्षक भी अपना शुल्क (लगभग 1500 रुपए) दे रहे हैं।आने जाने का किराया अपना, गणवेश का खर्च अपना।
फिर सबसे बड़ी बात नागपुर इस समय गर्मी से झुलस रहा है।45 डिग्री से ऊपर।कहां तो लोग गर्मी की छुट्टियों में ठंडे स्थल पर जाते हैं।यहां पर भारत के सबसे गर्म स्थानों में से एक पर आए हैं।
और ऐसा ही सारे देश में चल रहा है।
मैंने पता किया तो जानकारी मिली की देश में कोई 90 संघ शिक्षा वर्ग लगे हैं।लगभग 20,000 स्वयंसेवक संघ का शिक्षण ले रहे हैं।
कठोर परिश्रम, भीषण गर्मी, गंभीर बौद्धिक 4 घंटे का प्रतिदिन शारीरिक,अति सामान्य भोजन…सब स्वीकार,और सब कुछ हंसते गाते। क्योंकि देश के लिए आवश्यक संघ का संगठन तंत्र खड़ा करना है।
ऐसी कठिन साधना से ही लाखों समर्पित स्वयंसेवकों व हजारों प्रचारकों का निर्माण हुआ है।
सायंकाल लगभग 3 घंटे वहां रूककर धन्यता का अहसास कर मुंबई के लिए रेल लेने चल पड़ा।~सतीश