एक पत्र देश के युवाओं के नाम!
प्रिय युवाओ! सस्नेह नमस्ते!
आपको यह जानकारी मिल ही गई होगी कि अमेरिकी बहुराष्ट्रीय कंपनी अमेजॉन ने गत 2 वर्षों में ही 8456 करोड रुपए लीगल एडवाइज़ व कंसलटेंसी के नाम पर बांटे हैं। व्यापारिक संगठनों (CAIT सहित) व देश के आर्थिक जानकारों का कहना है कि यह स्पष्ट रूप से विभिन्न स्तरों पर दी गई रिश्वत का मामला है।
और फिर यह बात किसी और ने नहीं स्वयं अमेजॉन के एक प्रमुख एग्जीक्यूटिव ने ही विसलब्लोअर बनते हुए प्रकट की है। और अमेजॉन ने इसको मानते हुए इंक्वायरी भी बिठाई है किंतु चोर स्वयं अपनी इंक्वायरी कैसे कर सकता है?
इसलिए भारत के युवाओं को इस रिश्वतखोर कंपनी के विरुद्ध एक व्यापक जन जागरण लेना चाहिए।
सन 1600 में आई ईस्ट इंडिया कंपनी की तरह है, यह अमेजॉन। ईस्ट इंडिया कंपनी ने भी सिराजुद्दौला के सेनापति मीर जाफर को रिश्वत देकर खरीदा था।इसीलिए पांचजन्य ने इसे “ईस्ट इंडिया कंपनी 2.0” कहा है।
और केवल वकीलों या व्यापारिक अधिकारियों को ही नहीं, बल्कि आम नागरिकों को भी इन दिनों (दिवाली दशहरे के मौके पर) भारी सेल (75-80% डिस्काउंट) जैसे खुलेआम सामान्य नागरिकों में भी अरबों रुपया (एक प्रकार की रिश्वत जैसा) बांट रही है।
किंतु इसका प्रमुख उद्देश्य संपूर्ण भारत की अर्थव्यवस्था पर अप्रत्यक्ष रूप से आधिपत्य जमाना है। भारत के करोड़ों छोटे दुकानदारों की सेल यह, ऐसे दाम एकदम घटाकर, खींच रही है और एक बार छोटे दुकानदार बाहर हुए, ऐसी 1-2 कंपनियों की मोनोपोली हुई, तो यह खूब दाम बढ़ाएगीं। सारे देश का डाटा तो चोरी कर ही रही हैं।
इसे रोकना ही होगा और क्योंकि युवा ही सबसे अधिक ऑनलाइन शॉपिंग करते हैं इसलिए युवाओं को ही आगे बढ़कर इस विश्व की सबसे बड़ी रिश्वतखोर कंपनी को अपने देश की अर्थव्यवस्था पर कब्जा करने से रोकना होगा।
छोटे दुकानदार और उनके संगठन इसके खिलाफ संघर्ष कर रहे हैं।अपने साप्ताहिक पांचजन्य ने इसके ऊपर विस्तार से लेख छापे हैं।सरकार भी प्रयत्न कर रही है,किंतु सबसे बड़ी बात है देश की सर्व सामान्य जनता और उसमें भी प्रमुख रूप से युवाओं को इस अमेजॉन कंपनी को भारत से भगाने का महान स्वदेशी आंदोलन चलाना होगा।सभी युवा इस विषय का अध्ययन करें,कंटेंट तैयार करें और अपने अपने तरीके से इस अभियान को सफल बनाने में जुटें। यही इस समय की देशभक्ति है और भारत की सर्वोच्च आवश्यकता भी।
जय स्वदेशी-जय भारत
~सतीश कुमार