कन्याकुमारी: तीन…तीन तपस्वीयों की तपस्थली!
मैं 2 दिन से कन्याकुमारी में हूं।यह स्थान तमिलनाडु के अंतिम छोर पर समुद्र का किनारा है। यह स्थान 3 महान तपस्वीयों की पूजा तपस्थली है।आप भी सुनो!
✓मां पार्वती:इस स्थान का नाम कन्याकुमारी पड़ा ही इसलिए है कि मान्यता है कि यहां मां पार्वती ने एक पैर पर खड़े होकर शिव को पति रूप में पाने के लिए तपस्या की थी। यहां वह एक पैर का निशान वा मंदिर मुख्य दर्शनीय स्थल है।
✓ स्वामी विवेकानंद: 1892 की 25-26.27 दिसंबर को स्वामी जी यहां आए। समुद्र में कूदकर इस शिला पर पहुंचे, 3 दिन बैठ ध्यान किया और फिर वह विश्व विजय के लिए अमरीका आदि हेतु निकल गए।
✓एकनाथ रानाडे: संघ के वरिष्ठ प्रचारक व सरकार्यवाह रहे माननीय एकनाथ रानाडे जी ने इस स्थल पर विराट विवेकानंद स्मारक व केंद्र बनाया जब यह स्थान ईसाइयों से घिरा हुआ था व राजनीति में हिंदुत्व विरोधी भरे पड़े थे।तब 1963 में 352 सांसदों के हस्ताक्षर करवा कर उन्होंने इस भव्य स्मारक व केंद्र को स्थापित किया।
जहां आज हजारों देशी व विदेशी पर्यटक आते हैं। हजारों लोगों को रोज़गर मिल गया है।पूर्वोत्तर में केंद्र के पूर्णकालिक शिक्षा व सेवा के क्षेत्र में अद्भुत कार्य कर रहे हैं।
ऐसी तपस्थली पर 2 दिन रह कर मैं भी उस महान तपउर्जा का एहसास कर धन्य हुआ।~सतीश कुमार
नीचे:उसी विवेकानंद केंद्र कन्याकुमारी के कुछ चित्र,स्वदेशी चिट्ठी के पाठकों हेतु