आज गुरुग्राम में उद्यमिता प्रोत्साहन सम्मेलन में मूलतः उत्तर प्रदेश की रहने वाली बहन कृष्णा यादव भी आई थी। सफल उद्यमी के नाते से उसने बोलना शुरू किया “20..22 साल पहले वहां गांव में हमारा काम धंधा पूरी तरह चौपट हो गया तो हम दिल्ली आ गए। पति ने बहुत कोशिश की,पर कोई नौकरी नहीं मिली।बच्चे रोटी को मोहताज हो गए।”
“फिर मैंने अचार बनाया और अपने पति को इसे बेच आने के लिए कहा। किंतु बिना पैकिंग के, अच्छे डिब्बे के वह कुछ खास बिका नहीं। पर हमने हिम्मत नहीं हारी। सब्जी की फड़ी लगाई, साथ ही अचार भी रख लिया।”
फिर किसी के बताने पर एक जगह इसकी पैकिंग व मार्केटिंग की प्रक्रिया सीखी। कुछ महिलाओं को इकट्ठा करके मैंने कहा “तुम अगर अच्छा अचार बना दो तो मैं इसको बेचने का प्रबंध कर दूंगी।”
मेरे पति ने इसमें बड़ा साथ दिया। धीरे-धीरे काम चल निकला। बाद में हमने घर पर ही एक छोटी सी फैक्ट्री डाल दी। आज देश में तीन जगह पर हमारी अचार बनाने की फैक्ट्री है।1000 से अधिक महिलाएं हमारे यहां से रोजगार पा रही हैं।कुल टर्नओवर सात करोड़ का है।”
हमने जब और विस्तार से पूछा तो उस बहन ने बताया कि उन्हें राष्ट्रपति व प्रधानमंत्री से भी पुरस्कार मिल चुके हैं। सब उसकी सफल गाथा सुन भावविभोर हुए।
आज देश भर में ऐसे ही कार्यक्रम हो रहे हैं।15 जुलाई से 21 अगस्त तक चलेंगे।
नीचे:गुरुग्राम के एक कार्यक्रम में महानगर संघचालक जी के हाथों सम्मान पत्र प्राप्त करती कृष्णा यादव व उद्यामिता,कौशल का महत्व समझते विद्यार्थी, बुलंदशहर का कार्यक्रम