देश की आबादी वृद्धि चाहिए 2.2!
कल हम मुंबई कार्यालय पर बैठे थे।संगठक राजीव जी, प्रांत प्रचारक व माधव नायर जी।
चर्चा में विषय निकला की देश की युवा आबादी का उसकी आर्थिक वृद्धि वा खुशहाली से सीधा संबंध होता है।भारत की विकास दर 8% से ऊपर निकल रही है तो उसका एक कारण भारत का युवा देश होना है,अन्यथा जापान यूरोप तो बूढ़े हो गए हैं चीन अमेरिका भी उसी राह पर है, इसलिए उनकी विकास दर कम आ रही है। वहां के परिवारों में उदासी बढ़ रही है।”
फिर माधव जी ने पूछा “भारत की क्या स्थिति है?”
मैंने कहा “थोड़ी चिंता की बात है। रिप्लेसमेंट दर 2.1 होती है।किंतु 2020 में ही हमारा वृद्धि दर 2.0 आ गया है।जनसंख्या भाषा में इसे टीएफआर कहते हैं(Total fertility rate) यानी प्रति महिला से पैदा होने वाले बच्चे।
राजीव जी ने पूछा “क्या किया जा सकता है,क्योंकि लोग तो आजकल केवल एक बच्चे से ही संतुष्ट हो जाते हैं?”
मैंने कहा “भारत में जनसंख्या की दर होनी चाहिए 2.2 जो अभी 2.0 आ गई है।इसमें भी हिंदू समाज की वृद्धि दर तो 1.9 ही है।इसलिए एक व्यापक जनजागरण समय की आवश्यकता है। अन्यथा जैसे बच्चों व युवाओं से विहीन, बूढ़ों के घर में ना कोई उल्लास होता है, ना आर्थिक वृद्धि। ऐसे ही 2070 तक भारत की आबादी 110 करोड़ व 2100 तक 72 करोड़ रह सकती है। उसमें भी बूढ़े अधिक होंगे।
प्रांत प्रचारक जी ने पूछा “विश्व में क्या स्थिति है?” मैंने कहा “यूरोप जापान सिंगापुर सब बूढ़े हो गए हैं। अब वे आबादी बढ़ाने के लिए बहुत प्रोत्साहन दे रहे हैं किंतु हो नहीं रही। हमारे पास अभी समय है।यदि इस पर देशभर में व्यापक चर्चा हो, क्योंकि हमारा परिवार व भारत, भविष्य में भी केवल तभी युवा व खुशहाल बना रह सकता है।
सब ने सहमति भरी।~सतीश कुमार
नीचे: परसों मुंबई में हुई प्रांत कार्यशाला के कुछ चित्र