नैतिक बल स्वदेशी कार्यकर्ताओं की विशेषता है!
गत सप्ताह में पठानकोट गया। वहां के कार्यक्रम संपन्न करने के बाद रात्रि को अपने विभाग संयोजक नरेश जी के घर रुका। मेरी ट्रेन रात को 1:45 पर थी। तो मैंने उन्हें कहा “मुझे कार में छोड़ने तो बेटे ने जाना है,आप क्यों जागते हो,सो जाइए।”
वह कहने लगे “नहीं! सतीश जी! आप दिन रात प्रवास करते हो, एक दिन आपके साथ मुझे भी 2:00 बजे तक जागना पड़ा तो क्या हुआ?”
मैंने समझाया पर वह नहीं माने।
फिर जब हम स्टेशन पहुंचे तो पार्किंग वाले ने ₹50 मांगे। उस समय पर केवल दो-तीन कारें खड़ी थी। मैंने कहा इस समय तो पार्किंग का कोई औचित्य नहीं। लेकिन नरेश जी बोले “यह यहां खड़ा है,क्या इसी बात के इसको ₹50 नहीं दे देनी चाहिए?”
मेरे चेहरे पर मुस्कुराहट उभरी।फिर जब स्टेशन के अंदर जाने लगे तो उस समय पर स्टेशन सूना पड़ा था। फिर भी वह प्लेटफार्म टिकट लेने लगे। सामने एक नंबर प्लेटफार्म पर ही ट्रेन आ रही थी,मुश्किल से वे 3-4 मिनट रुकते, प्लेटफार्म खाली पड़ा था। मैंने उनकी तरफ इस भाव से देखा भी की “क्या जरूरत है?”
पर वह कहने लगे “नहीं नहीं!हम स्वदेशी के कार्यकर्ताओं को नियम का पालन करना ही चाहिए।” मैं जब गाड़ी में बैठा तो अपने आप को भी धन्य महसूस कर रहा था। जय स्वदेशी जय भारत
नीचे:जब मैं हैदराबाद के प्रवास पर पहुंचा तो वहां के प्रांत संयोजक मिलने के लिए आए और ₹10लाख का चेक बिना हमारे कुछ कहे, भेंट करने लगे। लिंगा मूर्ति जी ने फोटो लेने को कहा तो वह उसमें भी मना कर रहे थे,पर फिर सुंदरम जी के कहने पर फोटो खींचवाया।