पढ़ाई के साथ कमाई करने वाला बना मेरा दोस्त!
परसों सवेरे मैं पुणे में सवेरे की सैर कर जब कार्यालय पहुंचा तो गेटकीपर गणेश पर नजर पड़ी।
मैंने सहज पूछा “क्या नाम है भाई? कहां के रहने वाले हो? कितना पढ़े हो?”
उसने उत्तर दिया “मैं परभणी का रहने वाला हूं। इस समय एम कॉम कर रहा हूं।और 3 साल से यह चौकीदारी का काम भी करता हूं,एक कंपनी के माध्यम से।”
मैंने पूछा “कितनी तनख्वाह मिलती है?”
“सर! मुझे ₹8000 मिल जाते हैं। ₹6000 तक का मेरा यहां खर्च हो जाता है।बाकी घर भेज देता हूं।घर में मां बाप हैं,अभी मकान बनाया है,खर्चा तो होता ही है।”
मैंने कहा “कब से ऐसा कर रहे हो?”
वह बोला “मैं प्लस टू करके आ गया था यहां पुणे शहर में।पहले एक होटल पर वेटर की नौकरी की फिर यह चौकीदार का काम। मेरे 80% से ऊपर नंबर आते हैं,इसलिए मुझे पढ़ाई का खर्च सरकार के वजीफे में से मिल जाता है।”
फिर मैंने पूछा “आगे क्या करना है?”
वह बोला “प्रदेश सिविल सेवा परीक्षा की तयारी करने वाला हूं।”
“पर वह तो पास करना आसान नहीं है?”मैंने कहा
“हां!पर मुंबई की एक संस्था मुझे सिविल सेवा परीक्षा की कोचिंग हेतु ₹40,000 दे रही है।आज तक मेरे नंबर कभी कम नहीं आए, मैं तो पहले ही प्रयत्न में पास करूंगा।”उसका आत्मविश्वास देख मैं चकित था।
मैंने उसे शबासी दी।और इसी तरह मेहनत के आधार पर जीवन में आगे बढ़ने को प्रेरित किया,और उसने मुझे इस हेतु आश्वस्त भी किया।
तब मैंने उससे कहा “तुम पूना में मेरे नए दोस्त रहोगे ।और उसने मेरे साथ सेल्फी खिंचवाई रहोगे।