बढ़ती महंगाई, कारण और निवारण!!
आजकल सब तरफ बढ़ती महंगाई की चर्चा है,ठीक भी है।इसका स्वदेशी कार्यकर्ताओं ने विश्लेषण जरूर करना चाहिए।
इस समय पर यूक्रेन रूस युद्ध और उसके कारण एक दूसरे पर लगाए गए प्रतिबंधों के कारण विश्व की सप्लाई चैन में बाधा आई है।तेल से लेकर अनाज तक अस्त व्यस्त हुआ है। नए प्रकार के समीकरण बनने में 6 महीने तक का वक्त लगेगा।अमेरिका से लेकर चीन व ऑस्ट्रेलिया तक महंगाई बढ़ी है।
सबके सेंसेक्स नीचे आ रहे हैं,करंसी डाउन हो रही है। भारत का तो डॉलर के मुकाबले में ₹75 से 77 हुआ है,पाकिस्तान का ₹200 पर पहुंच गया है(181 से)। चीन जापान की करेंसी भी लुढ़की है।विश्व की प्राय: हर करेंसी पर दबाव है।
फिर क्योंकि यूक्रेन गेहूं का तीसरा सबसे बड़ा उत्पादक देश है,किंतु निर्यात नहीं कर पा रहा इसलिए विश्व में खाद्यान्न का संकट भी हो रहा है। भारत में इस बार अत्यधिक गर्मी व दलहन तिलहन की मात्रा बढ़ने के कारण 3% गेहूं कम हुआ है।गत वर्ष109 मिट्रिक टन हुआ गेहूं इस बार 106 ही हुआ है। किन्तु भारत के पास बफर स्टॉक भरपूर रहेगा।
भारत सरकार भरपूर प्रयत्न कर रही है महंगाई को काबू करने के लिए, रिजर्व बैंक ने ब्याज दरें बढ़ाई हैं। विदेशी मुद्रा भंडार से कुछ डॉलर बेचकर रुपए को बचाने की कोशिश की है। सब प्रकार के प्रयत्न किए जा रहे हैं।किंतु क्योंकि यह वैश्विक प्रक्रिया से पूरी तरह जुड़ा हुआ विषय है इसलिए इतनी जल्दी हल नहीं होगा।
हमें क्या करना चाहिए? स्वभाविक है हमें गैर जरूरी वस्तुओं को खरीदने से अपने को रोकना होगा। हां! समाज में हाय तौबा मचाने की जगह संयमित उपभोग, पेट्रोल व अन्य कर सकने लायक चीजों पर संयम करना होगा। घर का बजट ठीक बना रहे इसके लिए सकारात्मक ढंग से योजना करनी होगी।
घबराने का कोई कारण नहीं।सब मिलकर इस चुनौती को स्वीकार करेंगे, तो अगले दो-तीन महीने में फिर से चीजें सामान्य हो जाएंगी, यह निश्चित है।~सतीश कुमार
नीचे:आज बंसीलाल विश्वविद्यालय,भिवानी हरियाणा में महिला उद्यमिता पर बहुत ऊर्जावान कार्यशाला संपन्न हुई।