भारत को चाहिए जीरो गरीबी रेखा!
3 दिन पहले जब मैं पुणे में था तो सवेरे शाखा से पहले सैर के लिए निकला। कोई आधा किलोमीटर जाने के बाद ही मैंने देखा कि वहां एक नाले के किनारे कुछ लोग सो रहे थे।कुछ ने मच्छरों से बचने के लिए मच्छरदानी लगाई हुई थी।
संयोग से जब रात मैं कार्यालय पर था तो थोड़ा परेशान था क्योंकि कमरे में मच्छर थे, मैं ठीक से सो नहीं पाया। लेकिन इन्हें देख कर मुझे आत्मग्लानि हो रही थी कि ये नाले के किनारे भी खुले में नींद ले रहे हैं और मुझे कार्यालय के कमरे में भी नींद नहीं आई?
दूसरी बात है,थोड़े दिन पहले मैं कोलकाता में जब था तब मैंने वहां के एक प्रांतीय अधिकारी से पूछा “कोलकाता में रात को फुटपाथ पर ही सोते होंगे, ऐसे कितने लोग होंगे?”
तो वह बोले “कम से कम 3 लाख, अधिक भी हो सकते हैं।”और यह हर शहर की स्थिति है।
देश को स्वतंत्र हुए 75 वर्ष हो गए हैं, किंतु आज भी 15% लोग ऐसे हैं जो गरीबी रेखा से भी नीचे जीवन यापन करते हैं।यानी जिनको रात को ठहरने के लिए छत नहीं, दो समय का अच्छा भोजन नहीं, ठीक ढंग के कपड़े नहीं।
यह कैसी आजादी है? हमें सोचना ही होगा और कुछ उपाय ऐसे करने होंगे कि जल्दी ही भारत शून्य गरीबी रेखा(Below poverty line) वाला देश हो जाए। 20..21 करोड़ लोगों को बीपीएल अवस्था में लेकर चलने वाला देश विश्व का नेतृत्व नहीं कर सकता। हमें जागना ही होगा। यही है स्वावलंबी भारत अभियान… उठ जाग भारत जाग रे…सतीश कुमार
नीचे: पुणे के फुटपाथ पर सोए लोगों के कुछ चित्र