मै सामान्यतया सवेरे 9 बजे से पहले फेसबुक व्हाट्सएप आदि नहीं देखता। पर आज अचानक ही शाखा से आते ही मेरा हाथ फोन पर पड़ा व फेसबुक खुल गई।
लेकिन शायद स्वदेशी चिट्ठी के पाठकों के लिए आज की चिट्ठी का ही उसमें मैटर मिलना था।
एक बेंगलुरु के डॉक्टर की कहानी देखी, जिसने 6 साल पहले गले की आवाज वाला बॉक्स केवल ₹50 में बना कर दिखा दिया।
वास्तव में डॉक्टर विशाल राव बेंगलुरु में हेल्थ केयर ग्लोबल में डॉक्टर हैं। वह गले के ऑपरेशन करते हैं। 2014-15 में उनके पास एक मरीज आया जो एक चौकीदार था।उसका गले का ऑपरेशन हुआ था। वॉइस बॉक्स उसका निकाल दिया गया था।कृत्रिम लगाने के लिए ₹30000 चाहिए थे,जो उसके पास थे नहीं। वह डॉक्टर विशाल राव के पास आया।किसी तरह उसका तो काम चला दिया दान लेकर। किंतु बाद में डॉ राव ने अपने रबड़ फैक्ट्री के मालिक मित्र शशांक से बातचीत की ।दोनों ने मिलकर सोचा कि यह बहुराष्ट्रीय कंपनियां जो छोटा सा पुर्जा 25.. 30 हजार में दे रही हैं।यह वास्तव में बहुत थोड़े में बन जाना चाहिए।
दोनों ने उस पर मिलकर रिसर्च किया,काम किया। लगभग 2 साल बाद वह उससे भी अच्छा गुणवत्ता वाला वॉइस बॉक्स बनाने में सफल हुए।जिसकी कीमत केवल मात्र ₹50 निकाली और नाम रखा ओम। क्या बात है?
और उन्होंने इसको ओपन मार्केट में रखा है।वैसे अब उनके छोटे भाई ने मिलकर इसका एक स्टार्टअप बना लिया है और उसको लगाने वाली बाकी आइटमो का मिलान कर इन्होंने ₹3000 में वह दे रहे हैं।जो भी हो डॉक्टर राव जैसे लोग भारत माता के सच्चे पुत्र हैं…मेरा अभिवादन,अभिनंदन!!
नीचे:कल प्रो. भगवती जी कानपुर में प्रान्त कार्यशाला में बोलते हुए, डॉ विशाल राव व सीकर जिला सम्मेलन में कश्मीरी लाल जी बोलते हुए,मंच पर अर्चना बहिन जी व अन्य बहिनें।