यूक्रेन-रूस युद्ध: उभरता भारत का कद!
कई कार्यकर्ता मेरे से कह रहे थे कि सतीश जी आप यूक्रेन युद्ध पर कुछ नहीं लिख रहे। फिर 3 दिन पहले जब मैंने जम्मू में इस विषय पर बात की तो कार्यकर्ता कहने लगे “सतीश जी! रूस तो हमारा दोस्त है हमें तो उसकी तरफ ही रहना चाहिए.पर आप तो यूक्रेन का पक्ष लेते दिख रहे हो?”
तो मैंने कहा “ध्यान रखिए! रूस हमारा दोस्त देश है पर पुतिन का यह निर्णय युद्ध का उचित नहीं। हम पुतिन के साथ नहीं हैं।”
“तो इसमें क्या फर्क है?”
मैंने कहा “नहीं! जैसे भारत के तो हम हैं पर इंदिरा गांधी के इमरजेंसी लगाने के निर्णय पर हम थे क्या?” “ऐसे ही पुतिन ने न केवल अपने व युक्रेन के हजारों लोगों को मरवा दिया है।लाखों लोग विस्थापित हुए हैं और अब तो सामान्य नागरिकों की भी हत्याओं का दौर चल रहा है। ऐसे में पुतिन के साथ होने का कोई तुक नहीं।”
“इसमें भारत की क्या स्थिति है?” मुकेश ने पूछा
तो मैंने कहा “जिस ढंग से भारत ने गत 2 महीनों में स्टैंड लिया है उससे विश्व भर में भारत की स्थिति बहुत मजबूती से उभरी है। आप जानते हो कि 21 देशों के विदेश मंत्री या दूत इन दिनों में भारत होकर गए हैं?”
“मोदी जी ने तीन बार पुतिन से तो दो बार युक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंसेंकी से बातचीत की है। भारत को सस्ता तेल भी मिल रहा है और भारत ने अपने आप को निरपेक्ष भी रखा है व यूक्रेन युद्ध को रोकने की बात भी कही है।”
जो भी होगा रूस और यूक्रेन दोनों का बहुत बड़ा नुकसान है,पुतिन जिम्मेवार है। पर भारत की जय जयकार है।~सतीश कुमार
नीचे:होली पर दिल्ली के स्वदेशी केंद्रीय कार्यालय परिवार के कुछ सदस्यों ने मिलकर फ़ोटो खिंचवाई।और मातृशक्ति भी पीछे नहीं रही।