विकास,खुशहाली के लिए अपनों का साथ जरूरी!
हुआ यह कि मैंने अपने कमरे में यह सोचकर एक कैक्टस का हरा भरा पौधा रख लिया की कैक्टस के पौधे को पानी या धूप हवा की ज्यादा जरूरत नहीं होती।
लेकिन जब कल प्रवास से लौटा तो मैंने देखा वह पौधा तो पूरी तरह सूख गया था। मुझे आश्चर्य हुआ। मैंने विजित को बुलाया और पूछा “क्यों हुआ होगा ऐसा?”
उसे भी कुछ समझ नहीं आया।
फिर मैंने माली से वही बात पूछी।उसने कहा “वैसे तो कैक्टस के पौधे को पानी, सूरज की ज्यादा जरूरत नहीं रहती, किंतु वह अकेला है इस स्थान पर 15..20 दिन से, इसलिये सूख गया है।”
बात ठीक थी। क्योंकि बाहर काफी गमले एक साथ रखे हुए थे।चाहे कैक्टस हो या दूसरे, सब हरे भरे थे।
माली ने मुझे बताया गया “पौधों को भी अगर अलग-थलग कर दोगे तो वह सूख जाएंगे। अपने के साथ रहकर ही कोई पौधा फलता फूलता है।”
यह मनुष्य जीवन के बारे में तो और भी सच है। फिर केवल अपनो के साथ रहना ही पर्याप्त नहीं,यदि रहते तो साथ साथ हैं, लेकिन मन नहीं मिले होते, खुला संवाद नहीं होता तो भी हम उदास होते हैं, विकास नहीं होता।
यदि हम मिल जुल कर रहते हैं,खुली चर्चाऐं करते हैं तभी हम ठीक से विकसित हो पाते हैं, प्रसन्नता भी रहती है।क्या कहना है आपका?~सतीश
नीचे:दोनों प्रकार के पौधे एक जो अलग-थलग रहा दूसरे जो सबके साथ रहे..