#एकस्वदेशीचिट्ठी सिद्धार्थ वर्मा के नाम
“शाबाश सद्धार्थ वर्मा!भारत एक राष्ट्र ही है!!”
(वे लंदन में भारतीय सिविल सेवा अधिकारी हैं।)
“प्रिय सिद्धार्थ वर्मा।सस्नेह नमस्ते।
कल लंदन के कैंब्रिज विश्वविद्यालय में जब राहुल गांधी ने बड़ा मूर्खतापूर्ण बयान दिया कि भारत एक राष्ट्र है ही नहीं, बल्कि यह राज्यों का मिलाकर बना एक संघ मात्र है, तो आपने साहस करके सभी के बीच में उससे तीखा प्रश्न किया “क्या आपको नहीं लगता कि एक राजनेता के नाते से आपका यह बयान न केवल गलत है, बल्कि विध्वंसक भी है?”
“आपने सबके बीच में राहुल को लताड़ दर देश का मान रखा,साहस का बड़ा काम किया।
यही नहीं, राहुल ने जब कुतर्क किया की नेशन की कल्पना,पश्चिमी देशों से आई है तो आपने निर्भीक होकर वहां कहा “नहीं! भारत में राष्ट्र की कल्पना वेद काल से है।स्वयं चाणक्य ने भी इस विषय में स्पष्ट किया है।”
राहुल ने फिर बचपना दिखाते हुए कहा “चाणक्य ने तो नहीं कहा,तो आपने फिर आइना दिखाते कहा बिल्कुल कहा है,और वह वाक्य दोहरा भी दीया।”
सब ने वहां आपके लिए तालियां बजाई। भारत को आप जैसे ही निर्भीक अधिकारियों की आवश्यकता है, न कि राहुल जैसे नासमझ राजनेताओं की।”
विश्व कान खोलकर सुन ले….
“भारत एक राष्ट्र है,अति प्राचीन राष्ट्र है…और यह हिंदू राष्ट्र है।”
“हां! मुझे दुख इस बात का अवश्य है कि राहुल के ऐसे बयानों से न केवल भारत की जनता के मन में कष्ट हुआ होगा बल्कि वह राहुल और कांग्रेस को ऐसी नादानी के लिए क्षमा भी नहीं करने वाले। भारत और विश्व भर में सिद्धार्थ जी!आपकी प्रशंसा हो रही है,स्वदेशी चिट्ठी की तरफ से भी आपका अभिनंदन।”~सतीश कुमार
नीचे: कल लुधियाना पंजाब में सफल उद्यौजक को एक कार्यक्रम में सम्मानित किया।