संघ की बैठक में रोजगार पर केवल प्रस्ताव नहीं भारत का #महासंकल्प पारित हुआ है।
3 दिन पूर्व कर्णावती गुजरात में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की बैठक में, जिसमें सम-विचारी 45 संगठनों के 12 सौ से अधिक कार्यकर्ता थे, रोजगार सृजन पर प्रस्ताव पारित हुआ है।
मुझे जितेंद्र जी का फोन आया “सतीश जी! बधाई जिस पर हम स्वावलंबी भारत अभियान चला रहे हैं उस पर ही प्रस्ताव पारित हुआ है।
मैंने कहा “अरे भाई! यह प्रस्ताव संघ ने पारित नहीं किया है यह भारत की जन-आकांक्षा थी जो कई वर्षों से उबल रही थी,जन ज्वार ने ही यह सब कराया है।अन्यथा अगर हमारे ही प्रयत्नों से होना होता तो कई वर्ष पहले हो गया होता।
वे बोले “मैं समझा नहीं!”
मैंने कहा “संघ में हम आम तौर पर आर्थिक विषयों पर प्रस्ताव नहीं करते, हम सामाजिक संगठन हैं, इस नाते आज तक किया भी नहीं। फिर भी यह हो गया है तो इसलिए कि देश की इच्छा और आवश्यकता है।”
थोड़ी देर बाद अर्चना मीना बहनजी का फोन आया
“भाई साहेब! अब हमें क्या करना होगा?”
मैंने कहा “अगले दो-तीन वर्ष संपूर्ण भारत के सब लोगों को इस महामारी से निपटने के लिए दिन रात एक करना होगा। अथक परिश्रम, संयम, त्याग की आवश्यकता होगी।”
“जैसे कोई मां-बाप अपने बेरोजगार बच्चे के लिए चिंतित होते हैं, इधर उधर भागते हैं ऐसे ही सब कार्यकर्ताओं को अगले दो-तीन वर्ष तक हर प्रकार के डिजिटल या प्रत्यक्ष, बैठके, सेमिनार, प्रकल्प दर्शन, नारे,उद्घोष गीत कविताएं सब बनाने होगें।व्यापक प्रवास होंगे।
बहनजी ने पूछा “इसमें सरकार की भूमिका?”
मैंने कहा “सरकार तो अनुसरण करेगी।यह लड़ाई समाज को लड़नी है जैसे करोना की लड़ाई सारा समाज एकजुट होकर लड़ा सरकार ने भी सहायता की ऐसे ही इसमें भी करनी होगी।”
अर्चना जी पूछने लगी “करोना की तो वैक्सीन निकल आई थी,पर इस बेरोजगारी का टीका क्या है?”
मैंने कहा ” #उद्यमिता ही इसकी वैक्सीन है।जिसे कई वर्षों के शोध के आधार पर विकसित किया है।यह #उद्यमिता का #टीका हर युवा को लगाना है।उसी गति से जैसे करोना की वेक्सीन हर व्यक्ति को लगाई।”
फिर मैंने अभियान के कार्यालय प्रभारी अनिल जी को फोन कर कहा “विश्व में आर्थिक महाशक्ति बने बिना हम विश्व का मार्गदर्शन तो छोड़िए, अपनी सुरक्षा भी नहीं कर सकते।”
“इसलिए भारत को शून्य गरीबी रेखा, 100%#रोजगार युक्त युवा और 10 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के लिए सब प्रकार की योजनाएँ करो,जो हर एक युवा का,हर भारतीय का स्वप्न भी है।”…जय स्वदेशी जय भारत।~सतीश
नीचे:संघ की बैठक व उसमें स्वावलंबी भारत के ताल का दृश्य