सबसे बड़ा हथियार होता है साहसी,संकल्पित मनुष्य!!
रूस यूक्रेन युद्ध 77 दिनों से चल रहा है।कौन ठीक, कौन गलत इस विषय को अलग भी रखें।तो भी दुनिया भर में एक आश्चर्य तो हो रहा है वह यह कि यूक्रेन की सेना जो रूस के मुकाबले में बहुत ही छोटी है,कैसे इतने दिनों तक न केवल टिकी है, बल्कि अनेक मायनों में उसने पुतिन की सेना के नाक में दम भी कर रखा है।
उसका एक कारण है यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंसेंकि यहूदी हैं।2014 में क्रीमिया पर रूस के कब्जे के बाद से ही गत सात-आठ वर्षों से वे तैयारी कर रहे। उन्होंने अपने नागरिकों को,युवाओं को मानसिक रूप से और सैन्य रूप से भी कुछ इस ढंग से प्रशिक्षित किया कि वह रूसी सेना के भारी सैन्य बंदोबस्त को बड़ी मात्रा में रोकने में सफल हुए।
मौर्योपोल नगर,जहां लगभग रूस ने कब्जा कर लिया है वहां यूक्रेन के एजबेस्टन यूनिट के सैनिक मौत की कगार पर होने के बावजूद भी सरेंडर नहीं कर रहे।
एक बार ठेंगड़ी जी ने हमे एक इतिहास का प्रसंग सुनाया था।
ब्रिटेन के सेनापति नेल्सन ने, जब विश्व विजेता नेपोलियन को हरा दिया तो उससे पूछा गया की “नेपोलियन की सेना काफी बड़ी होने के बावजूद आप कैसे जीते?”
तो नेल्सन ने कहा “It is not the gun that fights,those are trained hands,who fight..
But no, it is ultimately Heart behind that hands that fight.only brave hearted persons can win.not the arms only”~सतीश
नीचे: स्वावलंबी भारत अभियान का लोगो