रोजगार सृजन: जो अ_सरकारी है वही असरकारी है।
कल दिल्ली में 11 संगठनों के 50 कार्यकर्ताओं की रोजगार पर कार्यशाला थी,स्वावलंबी भारत अभियान की। संयोग से कल ही केजरीवाल ने दिल्ली सरकार के 50 अधिकारियों की रोजगार पर बैठक कर रखी थी।
जब मैं बैठक संपन्न करके निकला तो अपने कार्यकर्ता देवेंद्र ने मेरे से पूछा “दिल्ली सरकार भी बड़े रोजगार देने के दावे कर रही है और हम भी इतना प्रयत्न कर रहे हैं, क्या लगता है?”
मैंने कहा ” सरकारें और राजनीतिज्ञ आज से नहीं गत 70 वर्षों से ही ऐसे बड़े-बड़े दावे और घोषणाएं करते हैं। कुछ होता भी होगा। किंतु उनके दिल दिमाग में अगला चुनाव और वोट प्राप्ति की सोच ही रहती है। जबकि अपने कार्यकर्ताओं के मन में अपने युवाओं को रोजगार युक्त करने का दर्द व बड़ी इच्छा शक्ति। जो किन्हीं भी सरकारों के प्रयत्नों से अधिक प्रभावी होती है। हम युवाओं के अंदर की उद्यमिता को उभार रहे हैं,हम उन्हें आत्मविश्वास का,अपना रोजगार स्वयं बनाने का, विचार व प्रशिक्षण दे रहे हैं,आप ही बताओ कौन सफल होगा?”
देवेंद्र ने पूछा “सरकार के पास तो संसाधन बहुत होते हैं,हमारे पास तो कुछ भी नहीं, फिर कैसे होगा?”
मैंने कहा “विनोबा भावे जी कहां करते थे जो अ_ सरकारी है वही असरकारी है।क्योंकि समाज का अभियान वा जनजागरण सरकारी योजनाओं की अपेक्षा कहीं अधिक प्रभावी होते हैं।”
फिर मैने कहा “तुम देखना! अपना स्वावलंबी भारत अभियान भी अगले 2..3 वर्षों में जन जन का अभियान बन जाएगा।इसकी सफलता की गारंटी तो कार्यकर्ताओं की पवित्रता व दृढ़ संकल्प में है। नीचे:दिल्ली की कार्यशाला के फोटो