….तो पेट्रोल उपवास की सोचे भारत!
यूक्रेन रूस युद्ध को चलते 27 दिन हो चुके हैं।रूस बम बरसा रहा है तो अमेरिका व यूरोप के देश रूस पर अलग अलग प्रकार के प्रतिबंध लगा रहे हैं।इसके कारण से अन्तराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की जो कीमत 90-92डॉलर प्रति बैरल थी वह अब बढ़कर 130-132 डॉलर के आज तक के सबसे महंगे स्तर पर पहुंच गए हैं।
प्रश्न यह है कि हम भारत के लोग क्या करें? क्योंकि पेट्रोल के कारण न केवल हर क्षेत्र में महंगाई बढ़ती है बल्कि अपनी बड़े यत्न से अर्जित विदेशी मुद्रा भंडार पर भी विपरीत प्रभाव पड़ेगा।बजट घाटा बढ़ेगा और अंततः रुपए की कीमत प्रति डॉलर भी कम होगी।
आज मैंने जब एक कार्यकर्ता से बात की तो वह बोला “पर इसमें हम क्या कर सकते हैं?हम तो क्या सरकार भी कुछ नहीं कर सकती!”
तब मैंने कहा “हम एक काम तो कर ही सकते हैं… वह है पेट्रोल उपवास!”
कार्यकर्ता ने आश्चर्य से पूछा “यह क्या होता है?”
मैंने कहा “हम नवरात्रों में 9 दिन का कुछ न खाने का उपवास करते हैं, अपने जैन बंधु किसी विशेष वस्तु को लंबे समय तक न खाने या छूने का स्वबन्धन करते हैं, पर अपनी सेहत के लिए।
क्या देश की आर्थिक सेहत ठीक रखने के लिए हम यह नहीं तय कर सकते कि आगामी 20-22दिन हम न्यूनतम पेट्रोल/डीजल ही खरीदें?बस रेल या साइकिल का ज्यादा प्रयोग करें।कार मोटरसाइकिल बहुत आवश्यक होने पर ही चलाये।यह समय की मांग है और देश भक्ति भी।…सोचिए!”
नीचे:संघ की अखिल भारतीय बैठक कर्णावती(गुजरात) में स्वदेशी की तरफ से स्वावलंबी भारत अभियान की प्रदर्शनी व साहित्य बिक्री के स्टाल लगे।सहसरकार्यवाह डॉ कृष्ण गोपाल जी,अरुण कुमार जी,स्वदेशी संगठक कश्मीरी लाल जी,स्वदेशी के सह प्रचार प्रमुख धर्मेंद्र दुबे जी,अभियान की सह समन्वयक श्री मति अर्चना मीना जी व अन्य…