जहां कभी खड़ा होकर सब्जी बेचता था, वहीं आज चला रहा है उत्तरप्रदेश का सबसे बड़ा अपना स्कूल!
जब मैं 3 दिन पहले लखनऊ में था तो जिस कालेज के परिसर में कार्यशाला थी, उस एस आर इंस्टिट्यट के मालिक पवन सिंह जी से मैंने उनके जीवन के बारे में पूछा।
उन्होंने बताया “हम गांव में रहते थे। गांव के एक झगड़े के कारण ताऊ जी को जेल हो गई घर की हालत खराब हो गई तब मजबूरी में मुझे अपने ही खेत की सब्जी, यहां शहर में लाकर रोज बेचनी होती थी। सात आठ महीने एक थड़ी लगाकर ही मैंने सब्जी बेची। फिर चाय की दुकान और फिर कपड़े की दुकान की। बाद में मैंने पढ़ाई तो पूरी कर ली पर मैंने निश्चय किया “नौकरी न करके कोई अपना ही काम करूंगा, मेहनत करने वा बड़ा काम करने की सोच थी ही।”
“कुल कितने काम किए आपने जीवन में?” मैंने पूछा
वे मुस्कुराए व बोले” कुल 16 काम किए।2009 में यह कालेज वा स्कूल खोला।और आज मेरे पास कुल 15000 बच्चे पढ़ते हैं।”
मैंने कहा “बच्चों को और क्या क्या शिक्षा देते हो?”
तो वह बोले “मैं प्लस टू के बाद पढ़ रहे सभी बच्चों से संकल्प करवाता हूं की वह चाहे शुरू में कहीं नौकरी कर लें, पर अंततः जिंदगी में अपना काम ही शुरू करेंगे।क्योंकि मेरी यह इच्छा ही है कि अपना देश मालिकों का बने, अपने ब्रांड वैश्विक बनें तभी पूर्ण समृद्धि आएगी।”
वे फिर बोले “मेरी एक और विशेषता है।मेरे स्कूल कॉलेज में पढ़ रहे सभी 15000 बच्चे चाहे लड़के हैं या लड़कियां, उन्हें कबड्डी अवश्य खेलनी होती है। इससे उनको जिंदगी में संघर्ष करने और मर कर भी पुनः जीवित होने का संस्कार मिलता है।उनके विचार मुझे बहुत जचे इसलिए मैंने उन्हें अभियान की के मंच पर बुला कर

अभिनंदन किया।
नीचे:लखनऊ का उद्घाटन कार्यक्रम,फिर उसी दिन नागपूर में स्वदेशी चिंतन पुस्तक का विमोचन करते श्री नितिन गडकरी व लखनऊ के सबसे बड़े स्कूल के मालिक पवन सिंह जी।