People shop for groceries at a supermarket after curbs on social gatherings and public activities were announced following a rise of coronavirus disease (COVID-19) cases in Singapore

क्या आपने इस बात पर ध्यान दिया है कि ऑनलाइन रिटेल (Online Retail) कंपनियां कुछ दिन पहले तक आपको जो डिस्काउंट दे रही थी, जरूरी चीजों पर मिलने वाली वह छूट कम या खत्म हो गई है। देश में कोरोनावायरस के बढ़ते खतरे के मद्देनजर अधिक से अधिक लोग जरूरी चीजें ऑनलाइन (Online) खरीदने लगे हैं। इस वजह से ऑनलाइन रिटेल (Online Retail) कंपनियां ज्यादातर सामान को एमआरपी (MRP) पर बेचने लगी है। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) की एक रिसर्च रिपोर्ट के हिसाब से यह जानकारी मिली है। हाल में ही थोक महंगाई दर (WPI) के आंकड़े आए हैं और उस पर स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने एक रिसर्च नोट तैयार किया है।

मांग बढ़ते ही डिस्काउंट खत्म
एसबीआई (SBI) के इस रिसर्च रिपोर्ट में कहा गया है कि ग्रोफर्स (Grofers), नेचर्स बॉस्केट (Natures Basket), लीशियस जैसे ऑनलाइन डिलीवरी प्लेटफार्म ने कोरोनावायरस संकट के दौर में चीजों के भाव बढ़ा दिए हैं। देश में कोरोनावायरस के संकट के बीच अब ज्यादा से ज्यादा लोग ऑनलाइन खरीदारी करने लगे हैं और इस वजह से डिमांड और सप्लाई का मिसमैच हो गया है।

एक जैसी हुई कीमत
SBI रिसर्च नोट में कहा गया है, “कोरोना वायरस संकट से पहले ई-कॉमर्स साइट पर सामान एमआरपी (MRP) की तुलना में बहुत कम भाव पर मिल रहे थे। कोरोना संकट के दौरान मांग बढ़ने और आपूर्ति प्रभावित होने की वजह से वहां भी अधिक डिस्काउंट नहीं मिल रहा है। वास्तव में अब आपके पड़ोस वाली दुकान और ई-कॉमर्स (e-commerce) प्लेटफार्म पर कीमतें एक जैसी हो गई है।”

पहले देते थे डिस्काउंट
एसबीआई के रिसर्च नोट में कहा गया है कि ऑनलाइन डिलीवरी प्लेटफॉर्म ने कोरोना संक्रमण के दौर में जरूरी चीजों के भाव बढ़ा दिए हैं। इन प्लेटफार्म पर सामान बेचने वाले अधिकतर रिटेलर फिजिकल स्टोर की तुलना में अधिक कीमत चार्ज कर रहे हैं। फिजिकल स्टोर से प्रतिस्पर्धा और ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए पहले ई-कॉमर्स कंपनियां ज्यादा डिस्काउंट देती थी।

ऑनलाइन बिक्री की गणना नहीं
भारत में महंगाई दर तैयार करने वाले CSO के आंकड़ों में ऑनलाइन बिक्री (Online Sales) शामिल नहीं है। इस वजह से दिसंबर 2020 से अप्रैल 2021 तक के रिसर्च में खुदरा महंगाई दर 4.30 फीसदी रही, जबकि एसबीआई के रिसर्च में यह 5.35 फीसदी दिखी है। अगर ऑनलाइन बिक्री के आंकड़ों को शामिल किया जाए तो खुदरा महंगाई दर 60 बेसिस पॉइंट तक बढ़ सकती है। एसबीआई के रिसर्च रिपोर्ट में कहा गया है कि पेट्रोल-डीजल की महंगाई की वजह से लोगों के दूसरे खर्च घटे हैं। इनमें स्वास्थ्य, ग्रोसरी और यूटिलिटी सर्विसेज आदि शामिल हैं।

Source: Navbharat Times