covid jab

दुनिया भर में कोरोनावायरस का संकट (Covid Crisis) बढ़ रहा है और इस वजह से वैक्सीन (Vaccine) के साथ कई अन्य चीजों की भी काफी जरूरत महसूस की जा रही है। अब भारत और अफ्रीका के साथ कई गरीब और विकासशील देश एक समझौते पर सहमत हुए हैं जिसमें कोविड-19 से संबंधित हेल्थ प्रोडक्ट और तकनीक के पेटेंट से 3 साल के लिए छूट दी गई है। इसमें कोरोनावायरस की दवा (Covid Drugs) और वैक्सीन आदि भी शामिल है। इसके साथ ही कोरोना की दवाई (Covid Drugs) या उसके इलाज में काम आने वाले कंपोनेंट या उसके लिए जरूरी रॉ मैटेरियल पर भी पेटेंट की यह छूट लागू रहेगी।

इसी हफ्ते इस तरह के एक समझौते पर सहमति बनी है। भारत और दुनिया के कई गरीब देशों के बीच बनी इस सहमति में कोरोना संक्रमण से निबटने के लिए दवा (Covid Drugs) और टीके (Vaccine) के साथ ही डायग्नोस्टिक, थेरेपी, मेडिकल डिवाइस, पीपीई किट (PPE KIT) आदि के मसले पर भी पेटेंट से छूट के मामले पर इस तरह से एक सहमति बनी है।

कोरोना पर काबू पाने की मुहिम
भारत और दक्षिण अफ्रीकी देशों के बीच यह समझौता कोविड-19 की रोकथाम, इलाज और संक्रमण रोकने से संबंधित प्रयासों के लिए किया गया है। कारोबार के जानकारों का मानना है कि इस समझौते के तहत तकनीक और अन्य विशेषज्ञता बिना किसी परेशानी के साझा करने में मदद मिलेगी। उनका कहना है कि कोरोना महामारी (Covid19) पर काबू पाने के लिए सिर्फ पेटेंट संबंधी संबंधी बाध्यता खत्म कर देना ही जरूरी नहीं है। कोरोना वायरस (Covid19) महामारी पर सफलता पाने के लिए यह जरूरी है कि इससे संबंधित मैटेरियल और कंपोनेंट की उपलब्धता सुनिश्चित कराई जाए।

समझौते का उद्देश्य
इस समझौते का उद्देश्य यह है कि कोरोना महामारी (Covid19) पर काबू पाने से संबंधित चीजों के पूरे वैल्यू चैन तक दुनिया भर के देशों की पहुंच सुनिश्चित की जाए। भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच हुए इस समझौते में इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी राइट्स (IPR) से रिलेटेड कारोबारी मसले की बाध्यता 3 साल के लिए हटाने पर सहमति व्यक्त की गई है। इसमें कॉपीराइट और डिजाइन आदि से संबंधित मसले भी शामिल हैं।

पेटेंट हटाने का मतलब
इसका मतलब यह भी है कि कोरोना की दवा या टीका (Covid19 drugs) किसी भी देश ने विकसित किया हो, उसका डिजाइन किसी ने भी बनाया हो या उसका प्रोडक्शन किसी ने भी किया हो, अब समझौते में शामिल सभी देश उसका प्रोडक्शन कर सकते हैं। ये देश बिना कोई फीस चुकाए उसका इस्तेमाल कर सकते हैं। पेटेंट (Patent) हटाने का मतलब यह है कि जिस कंपनी ने उस प्रोडक्ट के डेवलपमेंट रिसर्च और प्रोडक्शन का एक्सक्लूसिव काम किया हो, उसे किसी अन्य कंपनी द्वारा प्रोडक्ट बनाए जाने पर कोई लाइसेंस फीस नहीं चुकाया जाएगा।


समझौते को मिली मान्यता

अब कहा जा रहा है कि पाकिस्तान और इंडोनेशिया जैसे 120 से अधिक देश भारत-अफ्रीका के बीच हुए इस समझौते का समर्थन कर रहे हैं। माना जा रहा है कि चीन भी भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच हुए समझौते का समर्थन कर सकता है। सरकार ब्राज़ील को भी इस समझौते के दायरे में लाने की कोशिश कर रही है। हाल में ही अमेरिका ने भी कोरोना वैक्सीन के लिए पेटेंट (Patent) संबंधी बाधा हटाने पर सहमति दी थी। जापान, स्विट्जरलैंड और यूरोपीय संघ के देशों के साथ भी इस तरह की बातचीत करने की कोशिश की जा रही है।

 

Source: Navbharat Times