पानीपत के उद्यमी अपनी कथा बताते हुए
हरियाणा प्रवास के आठवें दिन, आज पानीपत का जिला सम्मेलन था।
जब मैंने वहां के अनुभव पूछे तो वहां के बलजीत सिंह, मुकेश नारंग जी ने खड़े होकर बताया “वह और पानीपत के अन्य लोग अब 3D की चादर व मिंक कंबल पूरी तरह वहीं बनाने लगे हैं,और सस्ती कीमत पर! जैसे मिंक कंबल जो चीन से₹225 का आता है वह अब ₹200 में यहां पर मिल जाता है।
यही बात 3D की चादर के बारे में भी है। और ब्लिंक कपड़े के बारे में भी।”
दो-तीन वर्षों से यह प्रक्रिया जारी है।
मैंने पूछा “इनको बनाने के लिए जो मशीनें हैं,वह कहां से आती हैं?”
तो पानीपत के उद्यमियों ने बताया ” वे भी अब पूरी तरह सूरत(गुजरात) में बनती हैं।”
यानी पूरी तरह से स्वदेशी उद्योगों ने चाइनीज़ आयात को खत्म कर दिया है।
विभाग सम्पर्क प्रमुख महेश जी बोले
“इसके कारण से एक बड़ी बात यह हुई है, कि हजारों लोगों को दोबारा से पानीपत में रोजगार मिल गया है।” जब मैंने विस्तार से पूछा तो कार्यकर्ता पंकज सेठी ने कहा “चाइनीज़ आयात पर शुल्क की मात्रा बढ़ाने से हमें बहुत सुविधा हुई है!”
तब मैंने उन्हें कहा “हम तुम्हें मानगे तब,जब यहां का कंबल-चद्दर चीन को ही निर्यात करने लगोगे!”
सबने जय जयकार कर कहा “जय-स्वदेशी”