कश्मीरी लाल जी, डा:सुरेंद्र जी, उस परिवार में अरुण की माताजी, उसके बड़े भाई व अरुण के साथ
कल मैं व कश्मीरी लाल जी नोएडा के एक कार्यकर्ता के घर पर गए! वहां इठेला गांव में अरुण यादव अपना कार्यकर्ता है!
जब हम घर में खड़े थे तो उनकी माताजी ने बताया “फरवरी में हम अरुण की शादी कर रहे हैं!”
अरुण बीटेक है!घर में समृद्धि पर्याप्त है!
किंतु जब उसके रिश्ते की बात आई तो उसकी बुआ ने एक लड़की देखी और इनको आकर बताया कुल मिलाकर रिश्ता वहां हो गया!
मां ने बताया “अभी तक भी इस ने लड़की देखी नहीं है !और यह कह रहा है कि बुआ ने व मां ने जो कर दिया है,वह ठीक है!बड़े भाई और पिता जी ने परिवार देख लिया है! तो मुझको विश्वास है कि सब ठीक ही होगा!”
मैंने उससे व्यकतीगत बातचीत की “आगे चलकर कोई दिक्कत तो नहीं आएगी?”
तो उसने कहा सतीश जी “जो लव मैरिज भी करते हैं वह भी आपस में तलाक ले लेते हैं! लेकिन बड़ों ने और मेरी बुआ ने कई वर्षों से उस लड़की और उस परिवार को देखा होगा! तो मुझे अपनी घंटे 2 घंटे की बात पर, विश्वास करना चाहिए या अपनी बुआ पर जो वर्षों से उस परिवार को जानती है!”
यह सुनकर मैं सोच रहा था कि हमारा अभी भी पारिवारिक संस्कार कितना मजबूत है! और यह वास्तविकता भी है! तथाकथित लड़की- लड़का बहुत पहचान करके, रिश्ते का आजकल रिवाज तो है किंतु तलाक की दर पिछले 12-15 वर्षों में बहुत तेजी से बढ़ी भी है,यह भी क्या कटु सत्य नहीं है?
बड़े परिवार में विश्वास,उसका संस्कार,यह वास्तव में जीवन में सुरक्षा, समृद्धि व सुख का आधार बनता है!हमें अपनी परिवार परंपरा पर ना केवल गर्व होना चाहिए,बल्कि उसको मजबूत बनाने के भी लगातार प्रयत्न करने चाहिए!