आज सरदार वल्लभ भाई पटेल की 182 मीटर ऊंची प्रतिमा का अनावरण प्रधानमंत्री जी ने किया है! गुजरात में नर्मदा नदी के तट पर बनी इस मूर्ति की ऊंचाई दुनिया की किसी भी मूर्ति से अधिक है चीन की बुद्ध मूर्ति से भी 177 फुट अधिक,अमेरिका की स्टैचू ऑफ लिबर्टी से 2 गुना बढ़ी!
लेकिन प्रमुख बात है की इतनी बड़ी कल्पना का विचार!2010 में यह सोचना कि हम दुनिया में अब तक का सबसे बड़ा मूर्ति और प्रोजेक्ट बनाएंगे,यह विचार ही अपने आप में बड़ी सोच का है!
कौन बनाएगा?कहां से टेक्नोलॉजी मिलेगी?कहां से पैसा आएगा? विफलता हुई तो बदनामी होगी, उससे कैसे निपटेंगे?
लेकिन जिन्होंने देश को दुनिया में सर्वोच्च स्थान पर ले जाना हो,उनके पास सर्वोच्च मूर्ति का विचार तो होना ही चाहिए!
वैसे भी जो स्थान लिंकन को अमेरिका में मिला,बिस्मार्क को जर्मनी में मिला,जिन्होंने अपने अपने देश को एकीकृत किया, वही स्थान सरदार वल्लभ भाई पटेल को भी मिलना ही चाहिए था!
भारत में क्योंकि उनके ही कारण 562 रियासतों का 1947 में भारत में विलय संभव हो पाया!
भारत की एलएनटी द्वारा निर्मित यह प्रकल्प भारत की इंजीनियरिंग क्षमताओं का भी द्योतक है!यह ठीक है कि उसके कास्टिंग का काम चीन के ढलाई फैक्ट्रियों में हुआ है,किंतु पूरा प्रोजेक्ट भारतीय कंपनी एलएंडटी के नेतृत्व में ही हुआ है!और इसके आर्किटेक्ट भी वीके सुतार हैं!
इससे पर्यटन व उसके कारण से हजारों लोगों को रोजगार मिलेगा!अर्थ चक्र में वृद्धि होगी!वह बात अलग है!उस महापुरुष(सरदार वल्लभभाई पटेल)को वंदन व इतनी बड़ी सोच बनाना व उसे क्रियान्वित करने वाले प्रधानमंत्री का भी अभिनंदन!