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आज मैं दीनदयाल उपाध्याय मार्ग के स्वदेशी कार्यालय से आरके पुरम के लिए निकला। विजित ने ओला बाइक करके दी।
बाइक पर बैठते ही मैंने उससे पूछा “क्या नाम है, कहां के हो,कितनी कमाई करते हो?”
वह बोला “मेरा नाम सुधीर जायसवाल है! सुल्तानपुर उत्तर प्रदेश का रहने वाला हूं। यह बाइक पार्ट टाइम तो मैं पिछले दिसंबर से चला रहा हूं किंतु 4 महीने से तो पूरी तरह बाइक का ही काम है।”
मैंने पूछा “पहले क्या करते थे?”
वह बोला “विशाल मेगा मार्ट में नौकरी करता था। कोरोना के कारण 16000 की बजाय अब ₹9000 मिलेगा,यह पता चला, तो मैंने सोचा नौकरी भी करूं और पैसा भी कम, कैसे चलेगा?”
मैं वैसे भी पार्ट टाइम बाइक सवारी करवाता ही था अब मैंने फैसला कर लिया और ओला और उबर दोनों की ही ऐप में रजिस्टर कर लिया।

मैंने पूछा “घर कितना भेज लेते हो?” तो वह बोला “₹10000 तक घर भेज देता हूं 10 से 12 हजार रुपइया यहां मेरा खर्च हो जाता है। लेकिन मैं संतुष्ट हूं। फिर मैंने कहा “अगर तुम टैक्सी लोन पर लेकर चलाओ तो तुम्हारी कमाई बढ़ नहीं जाएगी? इस पर वह बोला “कहता तो भाई भी है, पर ठीक है, क्या करना ज्यादा कुछ करके?”
मैंने कहा “नहीं भाई! सोचो, अगर तुम इतना भी ना सोचते, तो गांव से यहां ना आते। गांव में 7-8000₹ कमाते, होते।लेकिन रुकने का नाम जिंदगी नहीं है, तुम्हें अधिक कमाई करने की सोचने ही चाहिए।” वह मेरे मुंह की तरफ देखने लगा। मैंने कहा “बच्चे बड़े होने ही हैं, उन्हें भी जरूरत होगी, इसलिए तुम टैक्सी लोन पर लेने व बड़ी कमाई का जरूर सोचो।”
वह मेरे मुंह की तरफ देखने लगा।मैंने कहा “अरे भाई! मैं तुम्हारा बड़ा भाई हूं, इस नाते से कह रहा हूं। उसने हामी भरते हुए सिर झुकाया और मैंने उसकी पीठ पर हाथ फेरते हुए कहा आज से तुम मेरे पक्के दोस्त हुए और वह,जी,जी कहते आगे बढ़ गया~सतीश कुमार
नीचे: नए, छोटे भाई सुधीर जायसवाल के साथ!