“यहां पहला स्वदेशी मालवाहकपोत(1902) बना,जिसे वी:वो:चिदम्बरम ने बनाया” स्व.जा.मंच के सहप्रांतसंयोजक श्रीधरन ने जब बताया तो मैंने कहा “पर हम तो हज़ारों सालों से समुद्र व्यापार करते रहे हैं” तब वे बोले “अंग्रेज़ों ने हमारा जहाजरानी एक बार तो पूरी तरह से बंद करवा दियाथा!फिर वी:वो ने हिम्मत करके नये सिरे से इसे शुरू किया” ये सब बातें तुतीकोरिन पोर्ट पर हो रहीं थीं…अद्वितीय महापुरूष सुब्रमण्यम भारती की जन्मस्थली पर उन्हें प्रणाम करते हुए मैंने गाया – ..”हे युगद्रष्टा,हे महायति, पदवंदन…”
*द्रविड़ आंदोलनों के कारण तमिलनाडूकी भूमि लगातार हिन्दुत्व विरोधी,उतर भारत विरोधीबनी रही है! पर सुब्रमण्यम भारती जो उच्चराष्ट्रवादी तमिलकवि हुए से लेकर विवेकान्द शिलास्मारक स्थापित करने वाले संघप्रचारक एकनाथ रानाडे व परिवार संगठनों की तपस्या का फल है कि आज वहाँ spiritual politics, स्वदेशी, मोदी हर किसी की ज़ुबान पर है,दक्षिण तमिलनाडू में स्वदेशी का काम बढ रहा है…
* small n medium industry associations ने बड़ा स्वागत किया बडी सार्थक चर्चा हुई.GST, Employment,आदि विषय हुए..मैंने उन्हें SME की महान ताक़त(रोजगार दे सकने की क्षमता) के बारे बताते हुए हनुमान जाम्बवंत का उदाहरण बताया…सब बहुत ख़ुश हुए..जय हो