दीवार फ़िल्म में जब अमिताभ बच्चन बोलता है “मेरे पास बंगला है, गाड़ी है, पैसा है…तेरे पास क्या है? तो शशिकपूर बोलता है “मेरे पास माँ है” कई बार सोचता हूँ 40-45 वर्ष पूर्व हिट हुआ यह डायलाग आज भी पूरा लोकप्रिय क्यों है? हम भारतीयों के मन में माँ के प्रति सर्वोच्च श्रद्धा होने से ऐसा है।एक दूसरा गीत “ऐ माँ तेरी सूरत से अलग भगवान की सूरत क्या होगी?” भी शायद इसीलिए हिट गीत रहा…
परसों लुधियाना के विशाल जी के घर मैं अल्पाहार कर रहा था!तो उनकी बेटी स्कूल के लिए निकलने लगी! तो उसकी माँ ने कहा “रूक! आज तेरा पेपर है, दही खाकर जा!” और अपने हाथ से बच्ची को दही खिलाने लगी! मैंने तुरंत फ़ोटो खींच लिया!
दूसरे फ़ोटो में मेरी माँ का फ़ोटो है! मेरा सौभाग्य ऐसा है कि जब मैं प्रचारक निकला तो पिताजी तो नाराज़ हुए पर माँ ने कहा “कोई बात नहीं हमारी सेवा के लिए तो दूसरे दो बेटे भी तो हैं, तू जा…कर देश का काम”।
मैं जब पठानकोट में प्रचारक था तो वहीं से ही प्रचारक निकले सुमितजी की माता जी ने भी कुछ ऐसा ही कहा “उसकी इच्छा है तो मैं कभी नहीं रोकूँगी…बस उसे कहना फ़ोन करता रहा करे!” यद्यपि दूसरा भाई काम के कारण दिल्ली रहता है, इससे वे घर पर अकेली हैं किन्तु फिर भी…यह है माँ !
*दो प्रसंग सुनो, डा:श्यामाप्रसाद मुखर्जी के पिता सर आशुतोष मुखर्जी अंग्रेज़ वायसराय की कैबिनेट में थे! एक दिन वायसराय ने कहा “लंदन में प्रधानमंत्री के साथ एक मीटिंग है तुम भी मेरे साथ चलना..इस पर आशुतोष जी ने कहा माँ से पूछूँगा,शायद वो न माने क्योंकि उसे लगता है कि समुद्रपार करने से दोष लगता है! तो वायसराय ने कहा”अपनी माँ से कहना कि यह मेरा हुक्म है!” आशुतोष ने कहा “कह तो दूँगा पर मैं अपनी माँ को जानता हूँ,वह कहेगी कि कह दो वायसराय से कि मेरा हुक्म है नहीं जाना”..”तो तुम किसका हुक्म मानोगे?”वायसराय ने पूछा! इस पर आशुतोष ने कहा “निश्चय ही माँ का, और इसमें मुझे सोचने की कोई बात ही नहीं!” और ठीक वैसा ही हुआ! आशुतोष गए नहीं ! अंग्रेज़ वायसराय दातों तले उंगली दबाकर रह गया…
*माँ के सर्वोच्च दर्जे को तो आदिगुरू शंकराचार्य ने कितना महत्व दिया कि सन्यासी होकर भी स्वयं अपने हाथ से माँ का दाहसंस्कार करने को अड़ गए जबकि इसे शास्त्रविरूध बता,गाँव वाले बहिष्कार की धमकी देने लगे! तो शंकराचार्य ने घोषणा की “माँ मेरे लिए सर्वोच्च है अत: अपवाद स्वरूप मैं यह कार्य करूँगा”(उन्होंने माँ को इसका वचन दिया था)…यह है हम हिन्दुओं में माँ का स्थान