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टैक्सी ड्राईवर मित्र के साथ सेल्फी
मैं परसों हैदराबाद से दिल्ली पहुंचा। कार्यालय के लिए टैक्सी ली। मैनें देखा ड्राइवर कुछ बड़बड़ा रहा था। मैंने पूछा, “क्या बात है भाई?”
तो वह बोला, “24 घंटे बाद नंबर आया और वह भी केवल ₹300 की पर्ची? इसमें 200 तो टैक्सी के मालिक को ही देना है मुझे क्या बचेगा?”
मैंने कहा, “कब से टैक्सी चलाते हो?”
बताने लगा, “लगभग 4 साल से।”
तो मैंने पूछा, “इतने दिन में तुमने अपनी कमाई करके अपनी टैक्सी क्यों नहीं डाली?”
वह कहने लगा, “सर कमाया तो मैंने कोरोना से पहले तक काफी अच्छा, लेकिन अब मेरे पास कुछ नहीं है।”
मैंने कहा, “3 साल की कमाई इकट्ठी नहीं की क्या? बैंक में होंगे। पीने वीने में तो नहीं लुटाए?”
वह बोला, “नहीं सर! मेरे को कोई गलत आदत नहीं है।”
वह थोड़ा संकोच में था। मैंने प्रोत्साहित किया, “बताओ- बताओ, मैं तुम्हारे बड़े भाई जैसा हूं।”
फिर वह थोड़ा खुला और बोला, “सर! मेरी दो बड़ी बहने हैं। उनकी शादी में ही मेरी सारी कमाई खर्च हो गई। अब करोना के बाद जीरो से शुरू कर रहा हूं, तो अपनी टैक्सी या ऑटो कहां से लूं?”
मैंने शाबाशी देते कहा, “कुछ घर से लेकर, कुछ लोन मिल जाएगा।”
इस पर वह मेरी तरफ देखने लगा और आगे बोला, “हां! कुछ तो करना होगा, क्योंकि अब मेरा नंबर है। घर के, गांव के कह रहे हैं शादी कर लो?”
मैंने पूछा, “तुम क्या सोचते हो?”
वह कहने लगा, “सोच में हूं! पैसा तो है नहीं, पर गांव वालों का दबाव बहुत है, हमारे यहाँ एसे ही होता है। आप क्या कहते हैं?”
मैंने कहा, “गांव वाले दबाव तो देते हैं पर पैसे भी देंगे क्या, घर चलाने के लिए? दबाव में क्यों आते हो? दो-तीन साल शादी नहीं करना, अच्छी मेहनत कर, कमाई करना। जब अपनी टैक्सी बना लो और ठीक कमाई शुरू हो जाए तभी शादी करना।”
उसकी आंखें चमकी, तो मैंने आग्रह किया, “मेरे को वायदा करो, बिना कमाई किए शादी नहीं करोगे! नहीं तो बहुत पछताना पड़ता है।”
वह बोला, “ठीक सर! अब तो पक्का है मैं आपकी बात ध्यान रखूंगा।”
और मुस्कुराते, आभार प्रकट करते मेरा ड्राइवर मित्र, संजय शाह मेरा सामान उतार चला गया।