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पेटेंट फ़्री वैक्सीन की याचिका पर हस्ताक्षर करते हुए, स्वदेशी जागरण मंच के अखिल भारतीय संयोजक सुन्दरम जी, मदुरै (तमिलनाडु) से।
कल मुझे पंजाब से एक फोन आया कार्यकर्ता पूछने लगा, “सतीश जी! आखिर कब तक इस कोरोना से मुक्ति मिलेगी?”
मैंने कहा, “क्यों चिंता करते हो? पहले से ही इसके गिरावट के संकेत मिलने लग गए हैं। महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश दिल्ली, मुंबई इन सबमें एक्टिव केस पिछले एक सप्ताह में लगातार कम हुए हैं। नए आने की रफ्तार थम गई है। या कम भी हुई है। दिल्ली छोड़ बाकी जगह पॉजिटिवीटी रेट भी कम हुआ है।”
“अखिल भारतीय स्तर पर यह आंकड़ा कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु व बंगाल के कारण से आ रहा है। अन्यथा 12 बड़े प्रांत या तो स्थिर हुए हैं या कम हुए हैं। ऑक्सीजन की सप्लाई उत्तर और मध्य भारत में ठीक हो गई है। दवाइयां, बेड अब मिलने लगे हैं। स्थिति नियंत्रण में है।”
तरुण जी बोले, “अच्छा! मुझे नहीं पता था, और वैक्सीन?”
मैंने बताया, “अब वैक्सीन कैसे तेजी से लगे यह प्रमुख चर्चा का विषय है। 17 करोड़ लोगों को लग चुकी है, विश्व में सबसे तेज़ गति से।”
मैंने फिर कहा, “आज देश के 29 प्रांतों में से 17 प्रांतों में एक्टिव मरीज कम हुए हैं। कुल 32000 मरीज कम हुए हैं।
बस! हम तेजी से व सक्रियता से वैक्सिंन पेटेंट फ़्री करवाने के अभियान को सफल करने में जुटें, याचिका हस्ताक्षर करने करने में जुटे। चिंता ना करें, सूर्योदय होने ही वाला है।