मिशन: हिमाचल में किसान की आय,
दोगुनी करना व विषमुक्त खेती करना!
कल मैं हिमाचल के पालमपुर विश्वविद्यालय में था! वहां पर हिमाचल के किसानों की आय को दुगनी व अधिक करने के क्या उपाय हो सकते हैं,इसको लेकर स्वदेशी जागरण मंच व अन्य कार्यकर्ताओं की बैठक थी!
उसमें आचार्य देवव्रत जो वहां के राज्यपाल हैं,उन्होंने आग्रह पूर्वक कहा कि हमें हिमाचल में ‘जीरो बजट प्राकृतिक खेती’ इसको एक मिशन मोड पर लेना होगा!
और केवल उन्होंने कहा ही नहीं बल्कि उन्होंने इस के प्रणेता सुभाष पालेकर को बुला कर दो बड़ी कार्यशालाएं भी करवाई हैं! जिसमें कोई दो हजार किसान वहां आए,व कैसे अपनी खेती की लागत यह न्यूनतम कर सकते हैं,इसका प्रशिक्षण भी प्राप्त किया!
प्रोफेसर अशोक सरयाल वाइस चांसलर पालमपुर विश्वविद्यालय,जिन्होंने इस बैठक का आयोजन किया था,उन्होंने किसान की आय बढ़ाने के कुछ अन्य पक्षों का भी जिक्र किया! प्रोफेसर सरयाल ने कहा “किसान की आय को बढ़ाने के लिए कृषि में सहायक गतिविधियां(Allied activities) को बढ़ावा देना होगा! पालमपुर विश्वविद्यालय ने पहले से ही 20 ऐसे विषयों पर काम शुरू कर रखा है!”
सोलन विश्वविद्यालय के vc डा:हरिचन्द् शर्मा ने कहा “किसान यदि अपनी गेहूं,चावल या अन्य उत्पाद को मूल्य संवर्धन करके बेचते हैं, तो उससे भी उसकी आय तेजी से बढ़ती है!”
मैने कहा “युवकों के मन में नौकरी का भूत सवार रहता है,जिससे वे व्यापक सोच नहीं बना पाते!फिर नौकरियां भी सीमित हैं,अत:युवकों में “I will not be job seeker,But job provider” की भावना को जागृत करना होगा!
ऐसे प्रयोग स्वदेशी के कार्यकर्ताओं ने और अन्य लोगों ने विभिन्न स्तर पर शुरू कर दिए हैं!उसकी सक्सेस स्टोरी भी वहां अनेक आईं! विशेषकर गुरुकुल कुरुक्षेत्र की भूमि पर इसका बड़ा सफल प्रयोग हो चुका है!
अन्य कार्यकर्ताओं ने भी किसानों की आय को बढ़ाने और ग्रामीण रोजगार को स्थिर करने के क्या क्या तरीके हो सकता हैं, इस पर चर्चा की!
ऐसा लगता है कि अगले दो-तीन वर्षों में हिमाचल की रोजगार याने किसान की आय में तेजी से वृद्धि यह निश्चित रूप से होगी! क्योंकि राज्यपाल महोदय सहित सारी टीम इस समय पर वहां मिशन मोड में है!