कल दिल्ली में संबोधन करते,सरसंघचालक डॉक्टर मोहन भागवत! मंच पर, राष्ट्रीय संयोजक अरुण ओझा जी सरोज मित्र व संगठक कश्मीरी लाल जी! तथा नीचे मंत्रमुग्ध होकर सुनते कार्यकर्ता!
लो श्रद्धांजलि, राष्ट्रपुरुष!!
शतकोटी हृदय के कंज खिले हैं
आज तुम्हारी पूजा करने सेतु हिमाचल संग मिले हैं!
कल सायं,नई दिल्ली में अंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर का बड़ा सेमिनार हाल! पर उसमें तिल रखने की भी जगह नहीं थी! कारण केवल एक! जिस राष्ट्र ऋषि ने स्वदेशी, मजदूर व किसान क्षेत्र में भारत ही नहीं दुनिया को एक नया विचार,नया दृष्टिकोण दिया,ऐसे श्रद्धेय दत्तोपंत ठेंगड़ी जी की जयंती के अवसर पर वर्तमान की राष्ट्रसाधना के मुखिया संघ सरसंघचालक डॉ मोहन भागवत जी द्वारा श्रद्धांजलि दिए जाना!
जिसमहामानव के ह्रदय में मजदूरों,किसानों,गरीबों,बेरोजगारों के लिए पीड़ा थी,जो इन सबके लिए भारत की नहीं,दुनिया की शोषण कारी शक्तियों से सफलतापूर्वक भिड़ गया, आज उसके बारे,उनके विचारों के बारे सुनने इतने बंधु,बहिनें आईं थी!
सामने बैठे थे स्वदेशी जागरण मंच,भारतीय मजदूर संघ,किसान संघ के कार्यकर्ता,अनेक सांसद,विधायक संत, सामाजिक संगठनों के मुखिया,युवा,प्रौढ़, व महिलाओं का उत्साही समूह!
डॉ मोहन भागवत जी ने दत्तोपंत ठेंगड़ी की दो पुस्तकों का उदाहरण दिया! पहली Third way(, तीसरा विकल्प)! और कहा आज दुनिया समाजवाद व पूंजीवाद से परेशान है! उनको तीसरा विकल्प याने भारतीय विकास मॉडल चाहिए!
उन्होंने 1989में ही घोषणा कर दी थी कि सभी प्रकार के लाल झंडे फ्रॉम पिंक टू डार्क रेड बीसवीं शताब्दी के प्रारंभ में ही भगवा ध्वज में समाहित हो जाएंगे और उनकी यह भविष्यवाणी आज सत्य सिद्ध हुई है!
दूसरा उन्होंने दत्तोपंत जी की कार्यकर्ता पुस्तक का हवाला देते हुए कहा की स्टेटस कॉन्शियस लीडर व कंफर्ट लीविंग कार्यकर्ता,जिस संगठन में आ जाएं तो वह बैठ जाता है! अतः हमें सावधान रहना चाहिए!
उनकी सादगी का अनुभव..तब(1988)मैं कुरूक्षेत्र जिला प्रचारक था! वे कैथल के निकट जगदीशपुरा गांव में किसान संघ के वीरेन्द्रजी शर्मा की बेटी के विवाह हेतू आए थे!सूचना में कहीं चूक हुई और बसअड्डे पर कोई पहुंचा नहीं!मोबाईल तो थे नहीं! वे अपना छोटा अटैची उठाए पैदल ही चल पड़े..उन्हें पता था कि गांव 4-5 कि:मी दूर है! दूसरी तरफ क्योड़क गांव की शाखा पूर्ण कर मैं कैथल आ रहा था! उन्हें ऐसे जाता देखा तो घबरा कर मैने मोटरसायकल रोका व हल्की डांट खाते हुए उन्हें वहां गांव ले गया! पर वे बोले”चलो अच्छा है,आज व्यायाम हो गया,रात को खूब भोजन कर सकूंगा”
आज जब दत्तोपन्त जी की जयंती सारा देश मना रहा है,वह केरल जहां दत्तोपन्त जी ने संघ कार्य प्रारंभ किया आज शबरीमाला का विराट आंदोलन देखकर व संपूर्ण देश में हिंदुत्व, स्वदेशी, की उठ रही लहर को यदि स्वर्ग में बैठे दत्तोपंत जी देखते होंगे तो निश्चय ही वह प्रसन्न होंगे कि हां मेरा स्वप्न साकार हो रहा है,मेरे लगाए हुए बीज आज वटवृक्ष बन कर खड़े हैं!कि देश ही नहीं दुनिया में हिंदुत्व व स्वदेशी की जय जयकार होने लगी है।