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अमूल डेयरी में निरीक्षण करने के बाद, उसके अधिकारियों से बातचीत व एमडी सोढ़ी जी द्वारा स्वदेशी जा. मंच की टीम का स्वागत।
5 दिन पूर्व हम गुजरात के आणद में, स्थित अमूल डेयरी का मुख्यालय देखने गए। वहां के सीएमडी आर एस सोढ़ी ने बहुत सुंदर व्यवस्था करवाई थी।
प्रातः काल ही हम वहां की प्राथमिक इकाई (जहां दूध एकत्र होता है) देखने गए। किसान लाइन में लगकर दूध जमा करा रहे थे। साथ ही साथ फैट कितना, कीमत कितनी, सब कुछ कंप्यूटराइज्ड तरीके से जान रहे थे।
अत्यंत साफ सुथरा केंद्र।
बाद में जब अमूल डेयरी (फैक्ट्री) व उसकी, दूसरी इकाई जहां चॉकलेट बनती है, भी देखने गए। उन्होंने कोरोना काल में पेप्सी कोक के मुकाबले फल आधारित पेय भी निकाल दिया है, जो आगे बड़ी क्रांति बनेगा।
बाद में जब चर्चा हुई तो सोढ़ी जी ने बताया की गुजरात के सभी 18,750 ग्राम पंचायतों में इसके केंद्र हैं। वहां से जिलों में ही एकत्र व प्रोसेस होता है।36 लाख किसान इसका फायदा उठाकर अपनी आय वृद्धि कर रहे हैं। सब कुछ पारदर्शी। हमारे मुहँ से निकला, “वाह!”
हमने पूछा, “इसका राज क्या है?”
वे बोले, “सरदार पटेल की प्रेरणा, त्रिभुवन पटेल की हिम्मत व वर्गीज कुरियन के दूरदर्शी नेत्रत्व का परिणाम है। श्री त्रिभुवन पटेल ने 1946 से 1949 तक किसानों को एकत्र कर सहकारी समिति बनाई। उन्होंने वर्गीज कुरियन को जो उस समय अमरीका से डिग्री लेकर आए थे, उन्हें इसे अपने जीवन का मिशन बना लेने का आग्रह किया। और मूलत: केरल के इस व्यक्ति ने गुजरात की भूमि पर दुध को ही अपना धर्म बनाकर 57 वर्ष (2007 में देहांत तक) अनथक साधना की। तभी उन्हें ‘मिल्क मैन ऑफ़ इंडिया’ भी कहा जाता है।
परिणामस्वरुप आज अमूल 52 हजार करोड़ रुपए का संस्थान हो गया है।दुनिया के 40 देशों में इसके उत्पाद जाते हैं। वास्तव में स्वदेशी सोच व सहकारिता का यह मॉडल सारी दुनिया के लिए अध्ययन और प्रेरणा का केंद्र बना है।…जय स्वदेशी जय भारत।