बात 1987 के अक्तूबर मास की है! मैं गाँव कयोड़क (हरियाणा) से सायंशाखा के बाद मोटरसाइकिल से कैथल गुनगुनाता हुआ लौट रहा था! हल्के अन्धेरे में मैंने एक पैदल आते व्यक्ति को देखा तो कुछ पहचाना सा लगा! 20-30मीटर आगे चले जाने पर भी मो:सा:घुमाया…वापिस जब उन सज्जन के पास रूका तो मैं घबरा गया…”ठेंगडी जी आप?” मैं यहाँ जिला प्रचारक हूँ ! कोई बसस्टैण्ड से साथ नहीं?”वे तुरन्त मोटरसाइकिल पर पीछे बैठ गए! “तुम लोग ध्यान नहीं करते- मेरी उम्र का?”उनकी मीठी डाँट खाकर मैं कुछ सहज हुआ! मोबाईल तो उन दिनों थे नहीं,सूचना ग़ैप के कारण कोई बसअड्डे नहीं पहुँच पाया तो वे पैदल ही जगदीशपुरा जो कि 5 KM दूर था चल पडे़ थे!हाथ में छोटी सी अपनी अटैची थामे!वहाँ किसान संघ के वीरेन्द्र जी की बेटी की शादी में उन्हें जाना था!’सादगी सरलता की मूर्ति- ज्ञान का भंडार संघप्रचारक दतोपंत ठेंगडी’ के लिए ये सामान्य था…
ये वही ठेंगडी थे जिन्होंने भारत का सबसे बड़ा मज़दूर संगठन BMS, सबसे बड़ा किसान संगठन BKS सबसे बड़ा स्वदेशी आंदोलन SJM खड़ा किया!”21वीं शताब्दी के सूर्योदय से पूर्व दुनिया भर के लाल झंडे(कम्युनिस्ट)from pink to dark red, भगवे झंडे में समाहित हो चुके होगें” यह घोषणा दुनिया से कम्युनिज्म के ख़त्म होने से पूर्व ही 1989में डा: हेडगेवार जन्मशती पर हुए अ:भा:प्रचारक सम्मेलन( नागपुर)में उन्होनें कर दी थी…. भारत में ऋषि परंपरा के नये वाहक श्रद्धेय दत्तोपंत जी की आज पुण्यतिथि है….