गत वर्ष टीम स्वदेशी के साथ बलराम जी को जब चीन वाली पुस्तक भेंट की व नीचे आज कुरूक्षेत्र कार्यक्रम में!
“इस संसार दी यात्रा पूरी करन दे मामले विच यार ने बाजी मार लई है!”
ये कथन है,पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री सरदार प्रकाश सिहं बादल का जो छतीसगढ के राज्यपाल बलरामजी दास टंडन के निधन पर श्रद्धांजलि व्यक्त कर रहे थे!
और यह सत्य भी है, क्योंकि दोनों अपने अपने दल(अकाली दल व भाजपा)के सर्वोच्च नेता हैं बल्कि समकक्ष होने व आपस में बहुत अच्छे संबध होने से पंजाब की राजनीतिक दिशा तय करने के अगुआ भी थे!
संघ के प्रचारक, जनसंघ के संस्थापक सदस्य,पंजाब के मंत्री, उपमुख्यमंत्री, पार्टी के अध्यक्ष रहे बलराम जी टंडन (90वर्ष) एक तरह से पंजाब की राजनीति के भीष्म पितामह रहे!
मेरा सौभाग्य कि न केवल पंजाब में प्रचारक रहते हुए अनेक बातें उनसे सीखने को मिलीं बल्कि छतीसगढ में भी तीन बार उनसे मिलना हुआ! कबीर जी का वाक्य “ज्यों कि त्यों धर दीन्हीं चदरिया…”हमारे टंडन जी पर सटीक बैठता है!
**अखंड भारत, भारत की
गहन ईच्छा या केवल नारा!
आज मैं स्वतन्त्रता दिवस पर गीता निकेतन कुरूक्षेत्र पर मुख्य वक्ता था! वहां अखंडभारत संकल्प दिवस मनाया गया! अध्क्षता करने आयीं डा:गीता सहवाल ने मेरा भाषण सुन कहा “आपने कहा यह भारत का स्वपन है, गहन ईच्छा है!”
“मैंने कभी इतना सीरियसली नहीं सोचा जबकि गीता निकेतन की पूर्व छात्रा होने के नाते इसका सुना तो कई बार था! केवल एक नारे जैसा समझी थीं!”
मैने कहा “अगर इस्रायल 1850-1900 वर्षों बाद भी अपनी भूमि वापिस ले सकता है तो हम क्यों नहीं! दृढ़ संकल्प की जरूरत है बस!”