अखिल भारतीय सहसंयोजक सुंदरम जी व दक्षिण तमिलनाडु के सह प्रांत प्रचारक आरमुगम जी, संघचालक श्रीनिवासन जी व अन्य के साथ सम्मेलन स्थल पर चर्चा करते हुए।
आज तमिलनाडु के मदुरई नगर में 18-19-20 जनवरी को होने वाले स्वदेशी जागरण मंच के अखिल भारतीय सम्मेलन की तैयारियों के लिए यहां पर कार्यकर्ताओं से बातचीत कर रहा था।
यहांकी भाषा तमिल मुझे बिलकुल समझ में नहीं आती।वह भी इंग्लिश बहुत थोड़ी समझते हैं। किंतु सब प्रकार की व्यवस्थाओं और अन्य विषयों की चर्चा करते हुए कहीं पर भी,थोड़े समय के लिए भी यह नहीं लगा कि मैं किसी दूर प्रदेश में आ गया हूं।
जिस भाव भावना व अधिकार से 2 वर्ष पूर्व हुई राष्ट्रीय सभा की कुरुक्षेत्र में तैयारियां या व्यवस्था कराते हुए कार्यकर्ताओं से बातचीत कर रहा था, पूरी तरह उसी भाव भावना से,अधिकार से यहां पर भी बातचीत हो रही थी। सवेरे जब सुंदरम जी के घर पर अल्पाहार बहनजी करा रही थी तो लुधियाना में सुदेश जी के घर पर और यहां पर कोई फर्क मुझे लग नहीं रहा था।वही परिवारिक भाव स्वदेशी जागरण मंच की विशेषता भी है।
बहुत अच्छी व्यवस्थाएं और तैयारियां हो रही हैं। श्री श्री रविशंकर महाराज इसके उद्घाटन में आने वाले हैं। किंतु मैं विचार कर रहा था कि देशभर में भाषा अलग होगी,वेशभूषा अलग होगी।कोई अन्य परिचय नहीं होगा।किंतु हम सब के बीच में स्वदेशी का भाव राष्ट्रभक्ति का भाव सब को जोड़ता है।
इससे कहीं पर भी परायापन या दूरी नहीं लगती। इसे ही कहते हैं राष्ट्रवाद।