कश्मीरी लाल जी का अभिनंदन! स्वदेशी संदेश यात्रा हमीरपुर व जम्मू सम्मेलन में मंच!
परसों हिमाचल का व कल जम्मू कश्मीर का स्वदेशी प्रान्त सम्मेलन था।
हमीरपुर में हिमाचल के प्रान्त समेल्लन में मुख्य अतिथि के नाते आये, कृषि विश्वविद्यालय के वीसी प्रो:अशोक सर्याल ने बहुत बढ़िया जानकारी दी।
उन्होंने बताया “3 वर्ष पहले तक भी हम दालों के मामले में आयातक देश थे,किन्तु गत 3 वर्षों में अपने किसानों, विज्ञानियों, व सरकार के सामूहिक प्रयास से अब हम आत्मनिर्भर हो गए हैं,!” याने सीधे सीधे 8 हजार करोड़ बचाये। “हमारे देश की जरुरत 22 लाख मीट्रिक टन दालों की है, पहले केवल 16-17लाख ही हम अपने देश में कर पाते थे..पर अब तो…बल्ले बल्ले है।
उन्होंने आगे कहा “2008में हम केवल 7 हजार करोड़ का बासमती चावल निर्यात करते थे,पर अब 30 हजार करोड़ का। सब प्रकार का चावल मिला कर कोई 44-45हजार करोड़ का चावल निर्यात करने लगे हैं,दुनियां में सबसे आगे हम हैं!”
और अब तो जब अमेरिका ने ईरान से तेल लेने पर प्रतिबंध लगाये तो हमने ईरान से तेल के बदले बासमती चावल भेज बड़ा रास्ता बनाया है!
आपको ज्ञात ही होगा की 70-80के दशक तक भारत को अपने खाने के लिए गेहूं चावल भी आयात करने पड़ते थे..पर अपने किसानों विज्ञानियों व सरकारों के संयुक्त प्रयास से हम दुनिया में सबसे बड़े दुग्ध उत्पादक,चावल उत्पादक व दूसरे नंबर के गेहूं और कपास के उत्पादक बन गए हैं…याने हमारा किसान केवल देश का ही नहीं बल्कि दुनिया का भी अन्न दाता हो गया है!
अब केवल तिलहन का मामला चिंता का रह गया है, जिसमें गत कुछ वर्षों में प्रगति के बाद भी 80-90 हजार करोड़ का आयात करना पड़ता है… अगर सरकारें जम के लग जाएं तो कोई कारन नहीं हम अपना यह पैसा न बचा पाएं…
हम होंगे कामयाब…एक दिन…मन में है विश्वास,पूरा है विश्वास…हम होंगे कामयाब..!
हिमाचल के वर्ग में अपने कश्मीरी लाल जी पूरा समय रहे..मै स्वयं जम्मू कश्मीर के वर्ग में भी गया।
दोनों सम्मेलन बहुत अछे संपन्न हुए।महिलाओं की भी अछी सहभागिता रही।आशा है दोनों प्रान्तों में इससे स्वदेशी के कार्य में अछी प्रगति होगी।