कल पानीपत में मां का श्रद्धांजलि कार्यक्रम था। वह 11 अक्टूबर को 82वर्ष की आयु में, स्वर्ग सिधार गई थीं। हम तीनो भाई 3 दिन सोनीपत में संस्कार प्रक्रिया व बाद में अस्थि विसर्जन आदि से निवृत्त होकर परसों रात को देरी से ही पानीपत पहुंच पाए थे। मन में थोड़ी चिंता थी की कल की व्यवस्थाएं वगैरा कैसी रहेगीं?
किंतु जब मुल्तान भवन, याने श्रद्धांजलि स्थल पर बड़े भाई नरेशजी व परिवार के लोग पहुंचे तो सभी देखकर अचंभित थे कि वहां तो इतनी सुंदर व बड़ी व्यवस्थाएं बना रखी थी। सभी कार्यकर्ता ऐसे जुटे थे,मानो उनके घर का ही कोई काम हो।
बड़ी संख्या में बहिन बंधु पहुंचे थे। स्वदेशी जागरण मंच के तो दूर-दूर से कार्यकर्ता आए ही थे संघ के उत्तर क्षेत्र के लगभग सभी वरिष्ठ प्रचारक वहां उपस्थित थे। अन्य संगठनों के लोग, शिक्षा मंत्री, मुख्यमंत्री सभी वहां आए। भोजन का प्रबंध, बैठने की व्यवस्था, माइक, चित्र सब ठीक। व्यवस्थाओं के बारे में जब मैं थोड़ी पूछताछ करने लगा तो एक कार्यकर्ता ने लगभग नाराज होते हुए कहा “सतीश जी! आप क्यों इन विषयों में दिमाग लगा रहे हो? आप केवल हवन व आने वालों से बातचीत करिए बस। बाकी हम देख लेंगे।” और सच में वैसा ही हुआ।
कितना खर्च हुआ,कितने लोगों का भोजन बना, किसने सबको सूचनाएं दी, कैसे सब हो गया, वास्तव में मुझे अभी तक भी स्पष्ट नहीं।
मैं सोच में पड़ गया, यह सब क्यों हो रहा है? तो वास्तव में पानीपत के और बाकी के स्वदेशी के कार्यकर्ताओं ने इस विषय को अपना पारिवारिक काम समझते हुए पूरे मनोयोग से किया। क्योंकि स्वदेशी का कार्यकर्ता संगठन को भी पारिवारिक भाव से ही चलाता है। मंच के कार्य का निरंतर विस्तार भी इसी पारिवारिक भाव पद्धति के कारण ही हो रहा है।
मैं नतमस्तक हुआ, पानीपत के व बाकी के स्वदेशी जागरण मंच व संघ के कार्यकर्ताओं के आगे।
एक क्षमा याचना: इन 4 दिनों में अनेक बंधुओं के फोन व संदेश के उत्तर नहीं दे पाया। जिन लोगों ने भी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष संवेदनाएं व्यक्त की उन सब का आभार~ सतीश कुमार

नीचे:स्वदेशी जागरण मंच के अखिल भारतीय संगठक कश्मीरी लाल जी, मुख्यमंत्री मनोहर लाल जी व हिन्दू जागरण मंच के अशोक प्रभाकर जी श्रद्धांजलि देते हुए।

स्वदेशी कार्यकर्ताओं का परिवार-भाव!
कल पानीपत में मां का श्रद्धांजलि कार्यक्रम था। वह 11 अक्टूबर को 82वर्ष की आयु में, स्वर्ग सिधार गई थीं। हम तीनो भाई 3 दिन सोनीपत में संस्कार प्रक्रिया व बाद में अस्थि विसर्जन आदि से निवृत्त होकर परसों रात को देरी से ही पानीपत पहुंच पाए थे। मन में थोड़ी चिंता थी की कल की व्यवस्थाएं वगैरा कैसी रहेगीं?
किंतु जब मुल्तान भवन, याने श्रद्धांजलि स्थल पर बड़े भाई नरेशजी व परिवार के लोग पहुंचे तो सभी देखकर अचंभित थे कि वहां तो इतनी सुंदर व बड़ी व्यवस्थाएं बना रखी थी। सभी कार्यकर्ता ऐसे जुटे थे,मानो उनके घर का ही कोई काम हो।
बड़ी संख्या में बहिन बंधु पहुंचे थे। स्वदेशी जागरण मंच के तो दूर-दूर से कार्यकर्ता आए ही थे संघ के उत्तर क्षेत्र के लगभग सभी वरिष्ठ प्रचारक वहां उपस्थित थे। अन्य संगठनों के लोग, शिक्षा मंत्री, मुख्यमंत्री सभी वहां आए। भोजन का प्रबंध, बैठने की व्यवस्था, माइक, चित्र सब ठीक। व्यवस्थाओं के बारे में जब मैं थोड़ी पूछताछ करने लगा तो एक कार्यकर्ता ने लगभग नाराज होते हुए कहा “सतीश जी! आप क्यों इन विषयों में दिमाग लगा रहे हो? आप केवल हवन व आने वालों से बातचीत करिए बस। बाकी हम देख लेंगे।” और सच में वैसा ही हुआ।
कितना खर्च हुआ,कितने लोगों का भोजन बना, किसने सबको सूचनाएं दी, कैसे सब हो गया, वास्तव में मुझे अभी तक भी स्पष्ट नहीं।
मैं सोच में पड़ गया, यह सब क्यों हो रहा है? तो वास्तव में पानीपत के और बाकी के स्वदेशी के कार्यकर्ताओं ने इस विषय को अपना पारिवारिक काम समझते हुए पूरे मनोयोग से किया। क्योंकि स्वदेशी का कार्यकर्ता संगठन को भी पारिवारिक भाव से ही चलाता है। मंच के कार्य का निरंतर विस्तार भी इसी पारिवारिक भाव पद्धति के कारण ही हो रहा है।
मैं नतमस्तक हुआ, पानीपत के व बाकी के स्वदेशी जागरण मंच व संघ के कार्यकर्ताओं के आगे।
एक क्षमा याचना: इन 4 दिनों में अनेक बंधुओं के फोन व संदेश के उत्तर नहीं दे पाया। जिन लोगों ने भी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष संवेदनाएं व्यक्त की उन सब का आभार~ सतीश कुमार
नीचे:स्वदेशी जागरण मंच के अखिल भारतीय संगठक कश्मीरी लाल जी, मुख्यमंत्री मनोहर लाल जी व हिन्दू जागरण मंच के अशोक प्रभाकर जी श्रद्धांजलि देते हुए।