बहन रेखा भट्ट जो पत्नि(सतीश जी आचार्य) उनकी लिखित पुस्तिका का विमोचन!
क्षेत्र प्रचारक दुर्गादास जी,अपने राष्ट्रीय संगठक कश्मीरी लाल जी,व प्रताप गौरव केंद्र के प्रमुख श्री ओम जी जो पुराने प्रचारक भी हैं,उनके हाथों से हुआ वहां का एक दृश्य!!
कल हम उदयपुर में,भव्य ‘प्रताप गौरव केंद्र’ को देखने के लिए गए! वहां जो देखा तो उसके लिए एक ही शब्द है, अद्भुत,अद्भुत!!
कुछ दिन पूर्व मैंने स्वदेशी चिट्ठी में विवेकानंद शिला स्मारक कन्याकुमारी के बारे में लिखा था!तो यहां मैं सोच रहा था कि क्या ऐसा ही उत्तर भारत में यह केंद्र विकसित हो रहा है? वह केन्द्र भी संगठन की योजना से वरिष्ठ प्रचारक एकनाथ रानाडे जी ने शुरू किया था तो यह भी संघ की पूर्ण योजना से व वरिष्ठ प्रचारक मा:सोहनसिंहजी की प्रेरणा से प्रारम्भ हुआ है!पुराने प्रचारक ओमजी पूरी तरह जुटे हैं!तो अभी वहीं के विभाग प्रचारक अजयजी को भी इस केन्द्र में लगाया है!
उसके अंदर जब ऑडियो,विजुअल प्रदर्शनी देखी तो मैं स्तब्ध रह गया!बप्पा रावल की शौर्य गाथाएं, महाराणा हम्मीर की गाथाएं सुनकर,राणा प्रताप के हल्दीघाटी युद्ध के सत्य इतिहास को जानकर रोम-रोम पुलकित हो उठा!
फिर हाड़ा रानी का स्व बलिदान!! क्या दुनिया में कहीं ऐसा उदाहरण है,कि अपना शीश काटकर पत्नि ने दे दिया कि पति युद्ध से विमुख ना हो?
की पन्नाधाय जो,राज्यपुत्र बच जाए इसके लिए स्वयं का पुत्र बलिदान करा दिया? माँ तुझे प्रणाम!!
और पद्मिनी का जौहर तो दुनिया में प्रसिद्ध है ही!यह सारा इतिहास देख सुनकर मैं सोच रहा था कि मैं इतना पुराना प्रचारक यदि भावुक हो रहा हूँ,तो यदि नई पीढ़ी के लोग यह देखेंगे,तो उनके अंदर कितनी देशभक्ति,कितना शौर्य जागेगा? कितना अपने पूर्वजों के प्रति स्वाभिमान जागेगा!
इसलिए सबको ना केवल यहां आना चाहिए,बल्कि बच्चों को अवश्य साथ लाना चाहिए! ताकि वह जाने कि भारत का इतिहास,राणा प्रताप का इतिहास, हमारे पूर्वजों का इतिहास कैसा है?कैसा बलिदानी, कैसा प्रेरक रहा है?
पुराना गीत,वहां, याद आ रहा था…
यह है अपना,राजपूताना नाज इसे तलवारों पर
जिसने सारा जीवन काटा बरछी तीर कटारों पर
यह प्रताप का वतन पला है,आजादी के नारों पर
कूद पड़ी थी,यहां हजारों पद्मिनी अंगारों पर
यहां लगा दी बहनों ने भी बाजी अपनी जान की
इस मिट्टी से तिलक करो यह धरती है बलिदान की वंदे मातरम….वंदे मातरम…!