कृष्ण जी शर्मा व कश्मीरी लाल जी के साथ एक पुराना चित्र
आज यमुनानगर में होने वाली विभाग बैठक के लिए मैं कल रात को सोनीपत से अपने ही एक कार्यकर्ता गौतम के साथ चला!गौतम ने मुझे अपनी कहानी सुनाई मुझे अच्छी लगी तो सोचा आपको भी बताऊँ! गौतम के ही शब्दों में “मैं संघ परिवार से हूं और मैंने एमटेक किया! एक मल्टीनेशनल में काम भी किया पर कुछ कारणों से मैंने नौकरी छोड़कर सोचा कि दूसरी नौकरी जल्दी ज्वाइन करूंगा!किंतु 8-9 महीने इंतजार करने पर भी कोई ठीक ढंग का ऑफर मिला नहीं!तब परिवार के लोगों व मित्रों के कहने पर मैंने अपना काम करने का निश्चय किया!अपने ही चाचा के लड़के को साथ मिलाया और प्लाईवुड बनाने की एक फैक्ट्री किराए पर लेकर काम करने का विचार किया! पैसा बैंक से ना लूं यह सोचा!परिवार की रेपुटेशन अच्छी है इसके कारण से बाजार से पारिवारिक मित्रों से कुछ पैसा इकट्ठा करने में कोई दिक्कत नहीं हुई!घर में से मुख्य रूप से पैसा निकाला और कुल मिलाकर मैंने यह प्लाईवुड की फैक्ट्री शुरू कर दी!”
उस समय मेरे मन में आया कि स्वदेशी विचार”Don’t be job seeker Be job provider कितना सटीक है! गौतम बता रहा था “आज लगभग सवा साल बाद मेरे पास लगभग डेढ़ सौ वर्कर काम कर रहे हैं!मेरा टर्नओवर लगभग 10 करोड़ पार कर गया है!सारे परिवार व बाजार के लोगों का स्नेह और विश्वास मेरे पर है,इसीके आधार पर ही मैं इस काम में सफल होता जा रहा हूं!” मैंने पूछा अगली योजना क्या है? “कोई गौशाला खोलने का अगर अवसर आया तो उसमें मैं जरूर अपना समय व शक्ति लगाऊंगा” मैंने कहा कि बैंक से लोन क्यों नहीं लिया?तो उसने कहा कि जब मुझे स्नेह,विश्वास व पारिवारिक इज़्ज़त से पैसा मिल रहा हो तो टेंशन वाला भारी सूद का पैसा क्यों लेता? मैंने उस को शुभकामनाएं दी और हम जगाधरी घर पर पहुंच गए!
आज विभाग की बैठक में आगामी स्वदेशी कार्यक्रमों पर्यावरण, रोजगार व परिवार, विशेषकर रोजगार के बारे में विस्तार से योजना रचना हुई!