कल मैं ‘the Hindu’ ईपेपर में उपराष्ट्रपति श्री वेंकैया नायडू जी का लेख पढ़ रहा था। उसको पढ़ कर मुझे लगा की सरदार पटेल के बारे में बहुत सी ऐसी जानकारियां हैं,जो अच्छे,अच्छे पाठकों को भी नहीं है।
तो कुछ उनके पहलुओं के बारे में अपने पाठकों को बता दूं,इसलिए आज यह स्वदेशी चिट्ठी में लिख रहा हूं।
1946 में कांग्रेस के अध्यक्ष पद का चुनाव था! जवाहरलाल नेहरू के अलावा कृपलानी व सरदार पटेल खड़े थे। किंतु महात्मा गांधी जी ने आग्रह किया कि नेहरू को बन लेने देना चाहिए।क्योंकि जो भी अध्यक्ष बनता वह अगले साल स्वतंत्र भारत का प्रधानमंत्री भी स्वाभाविक रूप से बनता।
किंतु सरदार पटेल ने यह सोच कर,की इससे कहीं कांग्रेस की फूट का फायदा अंग्रेज ना ले ले और आजादी आगे ना डाल दें,इसलिए महात्मा जी की बात मान ली। यद्यपि अधिकांश कांग्रेस समिति के सदस्य सरदार पटेल के ही पक्ष में थे।
इसे कहते हैं देश प्रथम। देश-भक्ति।
दूसरी बात जब भारत आजाद हो गया तो भारत में 566 रियासतों का विलय करने का बड़ा भारी प्रश्न था। सरदार पटेल क्योंकि गृहमंत्री थे,इसलिए यह उनका काम था।
उन्होंने साम-दाम-दंड-भेद सबका उपयोग करते हुए यह ऐतिहासिक विराट काम सफलतापूर्वक संपन्न कराया। प्रिवीपर्स आदि देकर,अधिकांश रियासतों को तो साम-दाम की नीति से अपने में किया।
किंतु जूनागढ़,हैदराबाद और त्रावनकोर की रियासतों को दंड-भेद का उपयोग करते हुए भारत में विलय करवा लिया!
इसीलिए वे लोह पुरुष और सरदार कहलाए।
इसको लॉर्ड माउंटबेटन जो भारत के अंतिम गवर्नर जनरल थे ने लिखा है “आजाद भारत की सबसे बड़ी उपलब्धि यदि कोई है, तो वह इन सब रियासतों को भारत में मिला लेना ही है!”
‘जम्मू कश्मीर के मामले में भी यदि सरदार पटेल को छूट दी जाती व नेहरू स्वयं उसे सुलझाने की ज़िद ना करते तो जम्मू कश्मीर की आज जो समस्या दिखाई दे रही है,वह शायद बिल्कुल ना होती।और जम्मू-कश्मीर भी अन्य 565 रियासतों की तरह ही शांतिपूर्ण तरीके से भारत का ही हिस्सा होता।’
इसके अलावा भी सरदार पटेल ने भारतीय प्रशासनिक सेवा को यह कहकर कि “अभी तक तो आप केवल अंग्रेजों का हुक्म मानते थे,किंतु अब आपको सामान्य भारतीय जनता की सेवा करनी होगी!” उस ढांचे को बनाए रखा याने आज का प्रशासनिक सरकार का ढांचा,यह भी सरदार पटेल की ही देन है।
जो काम अब्राहम लिंकन ने अमेरिका में किया जर्मनी में बिस्मार्क ने किया व गैरीबाल्डी ने इटली में किया याने अपने-अपने देशों की एकता का कार्य!वही सरदार वल्लभ भाई पटेल ने भारत में किया!
किंतु क्योंकि भारत दुनिया का विशालतम देश है!
अतः उस महापुरुष की मूर्ति भी दुनिया में सबसे विशाल ही होनी चाहिए थी और वह हुआ भी है।