आज जब मैं अंबाला छावनी में आईटीआई के बच्चों के बीच में बोल रहा था,तो मैंने उन्हें बताया “स्टीव जॉब, जिसने एप्पल कंप्यूटर कंपनी शुरू की, उसने स्नातक की पढ़ाई भी नहीं की थी। किंतु दृढ़ इच्छाशक्ति,लगन व साहस से उसने 1 ट्रिलियन डॉलर की कंपनी दुनिया को दी।”
मैंने उन्हें कहा “हमें पढ़ाई करते करते ही कमाई शुरू कर देनी चाहिए।”
फिर बच्चों से मैंने पूछा “क्या आप में से भी कोई ऐसा कर रहे हैं?”
तो आश्चर्य से वहां कोई 20बच्चों ने हाथ खड़े कर दिए। एक लड़की मंजूबाला ने बताया “मैं शाम को सातवीं-आठवीं के बच्चों को ट्यूशन पढ़ाती हूं!और ₹2000 महीने तक कमा लेती हूं!”
वहीं दूसरा विद्यार्थी अनूप जो अभी फर्स्ट ईयर में पढ़ रहा है,ने कहा “मैं शाम को 4 घंटे डिलीवरी ब्वॉय के नाते लगाता हूं और हर महीने ₹5000 तक कमा लेता हूं!”
तब मैंने उन्हें उनकी कहानी भी सुनाई, जिन्होंने गरीबी व थोड़ी पढ़ाई के बावजूद अपनी ना केवल स्वयं के लिए करोड़ों रुपए का रोजगार खड़ा किया बल्कि सैकड़ों अन्य को भी रोजगार दिया। त्रिशनीत अरोड़ा व BTW वाले का उदाहरण भी दिया।
यह सब सुनकर बच्चे उत्साह से भर गए और उन्होंने संकल्प किया “हम भी स्वरोजगार की तरफ जाएंगे।”
मैंने उन्हें वारेन बुफेट का वाक्य I started earning when I was 14, n today I think I started late.” सुनाया।
बच्चों ने तालियां बजाकर इस वाक्य का स्वागत किया और उसी राह पर चलने का निश्चय भी किया!