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तेलंगाना स्वदेशी प्रांत बैठक के कुछ चित्र
2 दिन का भाग्यनगर (पूर्व नाम हैदराबाद) का प्रवास था। वहां के प्रसिद्ध उस्मानिया विश्वविद्यालय में स्वदेशी थिंकर्स मीट थी। विषय था ‘आत्मनिर्भर भारत में तेलंगाना की भूमिका’।
मैं तो क्या बोलता, उत्साह से लबरेज वहां के अर्थशास्त्री व उद्योगपति एक से बढ़कर एक बोल रहे थे। खैर बाद में मैंने भी स्वदेशी दृष्टिकोण प्रस्तुत किया। कार्यक्रम जब खत्म करके निकले तो मनोहर जी पुराने कार्यकर्ता बोले, “अभी तो भाग्यनगर कॉर्पोरेशन में भगवा आया है, 2023 में पूरे तेलंगाना में लाएंगे।”
मैं उसका भाव समझते हुए मुस्कुराया।
भाग्यनगर से 50 किलोमीटर दूर वर्गल में आज प्रांत बैठक थी। 50 से अधिक कार्यकर्ता आए थे। प्रत्येक जिले को स्वाबलंबी जिला बनाने की योजना पर चर्चा हुई।
मैं 5 साल से तेलंगाना जा रहा हूं। पर इतना उत्साह, स्वदेशी के कार्यकर्ताओं में पहली बार देखा। वहां लिंगा मूर्ति जी, हरीश बाबू, जगदीश जी, क्षेत्र संयोजक मंजू नाथ जी सब डटे हैं, कि इस प्रदेश को स्वदेशी, पूर्ण रोजगार व समृद्ध प्रांत बनाकर दिखाएंगे।
वहां हैदराबाद को आगे भाग्यनगर ही बोला जाए, ऐसा प्रस्ताव पारित किया गया,जो उसका पुरातन नाम है। यह नगर के बीचोबीच स्थित भाग्यलक्ष्मी के प्रसिद्ध मंदिर के नाम से है। जैसे मुंबई, मुंबा देवी के नाम से है ऐसे ही भाग्यलक्ष्मी के नाम से भाग्यनगर। निजाम शाही के समय हैदर अली के नाम पर हैदराबाद कर दिया गया किंतु अब स्वदेशी का, स्वाभिमान का समय है। अब आक्रांताओं के नाम पर हमें अपने नगरों के नाम रखने की जरूरत नहीं।
~सतीश कुमार