टीम स्वदेशी का फ़ाईल फोटो व मनदीप जी के साथ
पारिवारिक व स्वास्थ्य कारणों से कुरुक्षेत्र के विभागसंयोजक प्रो:सोमनाथजी व जिला संयोजक मनदीप जी गत प्रांत बैठक में आ नहीं पाए तो आज मैं उनका कुशलक्षेम पूछने कुरुक्षेत्र गया! मनदीप ने मुझे एक प्रसंग बताया “ कुरूक्षेत्र के नगरसहसंयोजक सुरेशजी की बिटिया मैसूर मे पढ़ रही है़,वह कुछ अस्वस्थ चल रही थी तो इन्हें 15 दिन के लिए वहाँ जाना था! मैने फ़ोन पर प्रयत्न किया पर आपसे बात नहीं हो पायी तो मैनें वेबसाईट से मैसूर में रह रहे स्वदेशी के अपने प्रांत संयोजक का नंबर निकाला व बात बतायी! उन्होंने कहा ठीक है, और सुरेशजी मैसूर कार्यालय चले गए,कोई कठिनाई नहीं आई!” मैंने पूछा तुम्हारा कोई पहले परिचय था क्या?” उसने कहा “नहीं,पर स्वदेशी के हम कार्यकर्ता हैं और हमारा पारिवारिक पद्धति का संगठन है, यही परिचय था और विश्वास भी”
कहाँ कुरूक्षेत्र, कहाँ मैसूर?कोई परिचय नहीं न भाषा समझ आती है न कुछ और पर फिर भी…
ऐसे ही पीछे जब मदुरै प्रवास पर गया तो दो नये कार्यकर्ता लेने आए! मुस्कुराते हुए दोनों सीधे मेरे पास आए~”you satish ji?” तमिल स्टाइल कीअंग्रेजी में वे बोले..तो मैंने पूछा “How you identified me?वे बोले “we are swadeshi karykarta…we know our Adhikari n pracharak style? वैसे कश्मीरी लाल जी का व मेरा अनुभव ऐसा है कि हमें कभी लुधियाना के ललितजी,विशाल जी का घर हो या तुमकुर के प्रदीप जी या राजकोट के रमेशभाई दवे! वही आत्मीयता एक जैसा पारिवारिक भाव मिलता है! हम प्रचारकों को भी इसी से उर्जा मिलती है..इसी तरह बढरहा है ये स्वदेशी कार्य..