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माता के साथ राम मंदिर का मॉडल दिखाते हुए
राम मंदिर हेतु धन संग्रह का अभियान शुरू हो चुका है। 3 दिन पूर्व अपने सिरसा प्रवास में सोचा कि किसी एक घर में, मैं भी संपर्क करके आता हूं।
तो मैंने वहां के अपने सह विभाग संयोजक दर्शनलाल जी से कहा, “किसी एक नए घर में चलते हैं!”
तो हम वहां की एक कार्यकर्ता सुमन शर्मा को साथ लेकर एक परिवार में गए।
जैसे ही हमने विषय बताया तो परिवार की मुखिया, मां भावुक होते हुए बोली, “अरे! आप लोग तो मेरे घर ही आ गए! मैं तो कई दिन से टेलीविजन पर देख कर यह सोच रही थी की मंदिर के लिए, मैं भी पैसे तो जरूर भेजूंगी। पर सोचती थी किसको भेजूं? मुझे तो बैंक अकाउंट वगैरह कुछ पता नहीं है। आपने आकर, हमारे यहां, मुझे जितनी प्रसन्नता दी है कि मैं बोल नहीं सकती।”
उस घर से आने के तुरंत बाद मैंने दिल्ली के उस कार्यकर्ता को फोन किया, जो कुछ दिन पहले मेरे से पूछ रहा था कि घर घर से पैसे इकट्ठे करने की क्या जरूरत है। कोई भी दो चार बड़े सेठ, या कंपनियां आराम से दे देंगी।
मैंने उसे तब भी कहा था कि, “नहीं! हर व्यक्ति के अंदर बैठी जो राम-भक्ति है, उसका प्रकटीकरण करवाना अत्यंत आवश्यक है। सभी राम भक्तों को यह सुख देना कि “मैंने भी मंदिर निर्माण में योगदान दिया है” यह संगठन की सोच और काम है।”
आज इस माँ से मिलकर मुझे अपनी बात याद आ गयी और गहन संतुष्टि भी हुई की स्वदेशी जागरण मंच के कार्यकर्ता भी बाकी सबके साथ, घर-घर संपर्क कर यह खुशी बांट रहे हैं।
~सतीश कुमार