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प्रधानमंत्री 26 फरवरी को प्रात:9:30 पर कैबिनेट कमेटी आन सिक्योरिटी की मीटिंग में एयर स्ट्राईक के बारे चर्चा करते हुए

( बालाकोट हमले की अंदरूनी जानकारी)
14 फरवरी को हुए पुलवामा हमले के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तय कर लिया था कि अब पाक को कठोर सबक सिखाना ही होगा।
अगले 5 दिन तक सेना और खुफिया एजेंसियां अलग अलग विकल्प खोजतीं रहीं।सैटेलाईट फोटो, पाकिस्तानी भेदियों की जमीनी सूचनाएं, अपनी व अन्तर्राष्ट्रीय खुफिया सूचनाओं का पूरा तालमेल बैठाया गया।19 फरवरी की रात को केवल 7 लोगों में, जिसमें नरेंद्र मोदी, अजीत डोभाल,तीन सेनाओं के प्रमुख व IB, और RAW के प्रमुख थे, निर्णय हुआ कि बालाकोट पर हवाई हमला किया जाए। इसे इसलिए चुना गया था कि पाक स्थित 15 आतंकी शिविरों में से यह सबसे बड़ा भी था व इसके साथ कोई आबादी वाला क्षेत्र नहीं था। इसलिए केवल आतंकी ही मरने की संभावना थी।
बैठक से निकलते हुए अजीत डोभाल ने वायु सेना प्रमुख विरेंद्र सिंह धनोआ को कहा “ध्यान रखना! अपना नुकसान जीरो होना चाहिए,छोटी से छोटी बात पर स्वयं नजर रखना!”
26 फरवरी प्रातः 3:00 बजे का समय इसलिए तय किया गया क्योंकि 24 फरवरी तक बेंगलुरु में एयर शो चल रहा था दुनिया भर की नामी हस्तियां आई हुई थी।उनके रहते ऐसा हमला करना उचित नहीं था। फिर भेदियों ने जानकारी दी थी कि 25 फरवरी को नए रंग रुट बालाकोट के उस कैंप में आने वाले थे।
इसरो की मदद से हाई रेजोल्यूशन सैटलाइट पिक्चर्स प्राप्त की गईं। यह इतनी बारीक दिखाती थी कि एक एक इंच का हिसाब किताब उस में आता था। बालाकोट में जावा की पहाड़ियों पर 6 इमारतें बनी हुई थीं। इनमें 93 दौरा-ए- आम 81दौरा-ए-खास व 25 को दौरा-ए-जरार ( High tech weapons training) व 15 उनके ट्रेनर यह साथ वाली दो बिल्डिंग में ठहरे थे! याने 215 आतंकवादी।20-22 कर्मचारी रहे होगें।
पश्चिमी वायुसेना के प्रमुख चद्रंशेखर हरिकुमार इस आप्रेशन को लीड कर रहे थे।वैसे उनकी 25 को विदाई(retirement)भी थी,पर किसी को शक न हो,अत: दिन में विदाई कार्यक्रम भी किया,पर रात में….
25 फरवरी को रात्रि 9:30 बजे अजीत डोभाल ने प्रधानमंत्री को हमले की पूरी रूपरेखा बताई और फाइनल हरी झंडी मांगी।मोदी जी ने अनुमति दी व चुपचाप अपने निवास पर चले गए। वहां पर कंप्यूटर के ऊपर वे लगातार बीच-बीच में जानकारियां जुटा रहे थे।अंततः 3:00 बजे वायुसेना प्रमुख धनौआ ने अजीत डोभाल को सूचना दी “planes took off..operation starts..”
पहले 6 विमान ऊंचाई पर उड़ाए गए और उनको पाकिस्तान के बहावलपुर की तरफ उड़ाया गया जिससे रडार पर देखकर पाकिस्तान की वायु सेना समझी कि वे बहावलपुर पर हमला करने के लिए आ रहे हैं। ५ मिनट बाद पाकिस्तान ने उनका पीछा करने के लिए अपने विमान उड़ाए। अपने 12 मिग विमानों के पीछे कवर देने, 4 सुखोई-30 व उसके पीछे दो इमरजेंसी K2 विमान भी साथ उड़े।
लेकिन दूसरे 6 विमान, बहुत नीचे रहते हुए(राडार से बचने हेतू)बालाकोट की तरफ गए और इजरायल के स्पाइस-2000 नामक हथियार,जो बिल्डिंग के अंदर सीधे घुसता है और वहां जाकर फटता है,तय स्थान पर दागे।इसकी विशेषता यह है कि इससे बिल्डिंग नष्ट नहीं होती,बल्कि अंदर जाकर वह जितने भी व्यक्ति होते हैं उनको खत्म कर देता है।
ऐसे तीन बिल्डिंगों पर 5 निशाने बहुत सटीक लगे।एक निशाना हॉस्टल वाले कमरे पर नहीं लग पाया। पाकिस्तान की सीमा में, 7 मिन्ट रहकर,यह काम अपने पायलटों ने पूरा किया और 3:30 बजे ये विमान वापिस अपने स्थान पर लौट आए।
3:30 बजे अजीत डोभाल ने वीडियो कॉन्फ्रैस से बताया “operation complete,successful n over.”
मोदी जी मुस्कुराए, कुछ सवाल पूछे व 4:00 बजे योगासन करने के लिए चले गए। अंततः सवेरे 9:30 बजे की कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी की मीटिंग में ही सबको इसके बारे में बताया गया।
यद्यपि टेलीविजन पर पाकिस्तान के हल्ले के कारण से सवेरे 6:00 बजे ही यह खबरें आनी शुरू हो गई थीं कि भारत ने हवाई हमला किया है।
उस समय पर इसरो के सेटेलाइट से यह भी पक्का हो गया था कि 25 तारीख रात को वहां पर 300 मोबाइल एक्टिव थे, फिर इसी माध्यम से पता कि 35 पाकिस्तानी एंबुलेंस उस शिविर के तरफ सवेरे 8:00 गई है। अभी तक भी पाकिस्तान ने किसी को वहां जाने की अनुमति नहीं दी है, इससे भी स्पष्ट हो रहा है। फिर इंडिया टुडे की एक टीम ने स्टिंग ऑपरेशन करके वहां के कुछ लोगों से पूछा तो वे बोले “हां!भारी संख्या में लोग हताहत होकर ऐबटाबाद के अस्पताल में ले जाए गए हैं।”
[यह सब जानकारियां रक्षा मंत्रालय के सूत्रों ने इंडिया टुडे,टाइम्स ऑफ इंडिया,एनडीटीवी व अन्य कुछ माध्यमों को उपलब्ध करवाईं। उन सब से अध्ययन करने के बाद यह स्वदेशी चिट्ठी में लिख कर आपको जानकारी देने की सोची]