कल सोलन में स्वदेशी जागरण मंच हिमाचल की टीम को संबोधित करते कश्मीरी लालजी

खबर है कि फिल्म ‘अंधाधुन’ (दक्षिण भारतीय-राघवेंद्र निर्देशित) ने चीन में,पहले सप्ताह में ही कोई 300 करोड़ रुपए का व्यापार कर लिया है। इससे पहले दंगल व बाहुबली दो-दो हजार करोड़ रुपए से ऊपर का व्यापार चीन में ही कर चुकी हैं।
सब को यह जानकारी रहनी चाहिए कि भारत दुनिया में प्रति वर्ष 2000 फिल्में बनाकर सर्वोच्च स्थान पर है।
अमेरिका, चीन और जापान दूसरे तीसरे या चौथे नंबर पर हैं।भारत की फिल्म इंडस्ट्री का 18000 करोड़ रुपए, प्रतिवर्ष का उत्पादन है।
केवल चीन, अमेरिका ही नहीं अफगानिस्तान,ईरान यहां तक कि बांग्लादेश व पड़ोसी दुश्मन पाकिस्तान में भी भारतीय फिल्में खूब प्रचलित होती हैं।
इस फिल्म इंडस्ट्री के कारण से हजारों नहीं लाखों लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार भी मिला हुआ है।
दक्षिण भारतीय फिल्में अधिक प्रचलित हो रही हैं।भारत में कुल 20 भाषाओं में 13000 सिनेमाघरों में प्रति सप्ताह 40 से अधिक फिल्में रिलीज होती हैं। इसके कारण से हमारे निर्यात भी बढ़ रहे हैं और रोजगार भी। अप्रत्यक्ष रूप से भारतीय सोच व संस्कृति भी दुनियाभर में फैल रही है।
फिर भारत में कुछ लोगों को फिल्में थोड़ा खराब लगती होंगी, किंतु दुनिया के मुकाबले में यह सबसे अधिक सुसभ्य होती हैं।
भारत सरकार को इस मनोरंजन उद्योग को बढ़ावा देने के प्रयास करने चाहिए