डा: बिन्देशवरी पाठक व मुम्बई मे सम्पन्न हुई स्वदेशी विचार कार्यशाला मे आए मुद्रा व जनधन योजना की टीम के सदस्य रहे डा:शेखरस्वामी व अन्य
“आज आपको बता रहा हूं डॉ बिंदेश्वरी पाठक के बारे में। वही व्यक्ति जिसे 6 साल की आयु में अनुसूचित जाति के बच्चे से खेलने पर ही दादी ने ठंडे पानी से नहलाया था। किंतु वही ब्राह्मण बालक सारे भारत की सफाई अभियान का अगुआ बना! सुनो उसी की कहानी!!”
बिन्दु(युवा नाम) ने 1964में ग्रेजुएशन की लेकिन कोई ठीक सा काम मिला नहीं।1969 में महात्मा गांधी शताब्दी वर्ष चला तो छूआछूत मिटाने की,स्वच्छता की बातें चलीं। तो बिन्दू को आरा(बिहार) की म्यूनिसिपल कमेटी से 500रूपये में दो सार्वजनिक शौचालय बनवाने का काम मिल गया। इसीसे उसके दिमाग़ में एक क्रांतिकारी विचार कौंधा।’क्यों न मैं शौचालय बनाकर स्वच्छता भी लाऊँ व अपनी आजीविका भी कमाऊँ?’ शौच से आजीविका!! और SISSOएक NGO बनाया और डा:बिन्देश्वरी ने भारत मे स्वच्छता अभियान का बीड़ा उठाया और भारत मे सुलभ शौचालय की क्रांति हो गई। आज भारत के 640 शहरों में 8000 से अधिक शौचालय हैं!उनमें 35000लोग काम करते हैं…डा: बिन्देश्वरी पाठक को 70से अधिक राष्ट्रीय व अन्तराष्ट्रीय सम्मान मिल चुके हैं वे पर्यावरण व महिला सशक्तिकरण पर भी अच्छा काम कर रहे हैं।…मेरा देश चल रहा है और आगे बढ रहा है…