कार्यालय पर भोजन करते हुए व अन्य बातचीत करते हुए श्रीधर वैंबू व उनके सहायक प्रबाल सिंह जी
2 दिन पूर्व अपने अखिल भारतीय संयोजक सुंदरम जी ने मुझे फोन किया “जोहो कॉर्प के मालिक श्रीधर वैंबू तमिलनाडु से दिल्ली आ रहे हैं।मैंने बात की है, वे कार्यालय आऐंगे।”
आज वे आए, बातचीत शुरू हुई वे बोले “भारतीय युवकों में यह प्रतिभा है कि अमेरिका की आईटी इंडस्ट्री को भी नेतृत्व दे रहे हैं। क्योंकि भारतीय परंपरा, परिवार व संस्कारों में पले बढ़े युवा वहां विश्वसनीयता, योग्यता और परिश्रम के प्रतीक हैं।अगर हम उनको यहां पर ही सेटल कर ले तो वह भारत को भी अमेरिका बना सकते हैं।
फिर एक प्रसंग उन्होंने सुनाया।भारत सरकार के एक बड़े अधिकारी ने उनसे पूछा “ट्रंप भारतीयों के अमेरिका प्रवेश वाले वीजा H-1B पर रोक लगा रहे हैं।आपका क्या कहना है?” तो श्रीधर बोले “यह तो भारत के लिए अच्छा ही हो जाएगा! इससे भारतीय युवा, भारत में ही अपने सॉफ्टवेयर ब्रांड और कंपनियां खड़ा करने लगेंगे। अंततः भारत को फायदा ही होगा।”
उन्होंने स्वदेशी जागरण मंच और संघ के बारे में हमारे से विस्तार से जानकारी ली और बोले “मेरे को इस देश ने बहुत पैसा दिया है तो इसलिए मैं कुछ ग्रामीण उत्थान का काम कर रहा हूं, क्या खास बात है?”पर आप प्रचारक व अन्य कार्यकर्ता तो निस्वार्थ रूप से देश की सेवा कर रहे हैं।”
और हम सब अचंभित हो गए जब उन्होंने कहा कि मैं ऐसी तपस्या को प्रणाम करना चाहता हूं और वह कश्मीरी लाल जी के पैर छूने लग गए। यही नहीं उन्होंने कहा “मैं स्वदेशी आंदोलन के लिए जो बन सकेगा जरूर करूंगा, यह निस्वार्थ देशभक्ति है यही असली अध्यात्म है।”
केवल हम ही नहीं कार्यालय के बाकी सब बंधु भी हैरान थे कि जो व्यक्ति भारत का 76वां सबसे अमीर आदमी है, जिसके पास 9000 लोग रोजगार(नौकरी) पाए हुए हैं,12000 करोड़ रुपए की सॉफ्टवेयर कंपनी जोहो कोर्प का मालिक हो, वह इतना विनम्र, सरल,साधारण वेशभूषा में। यही नहीं कार्यालय पर भोजन करके वह आनंदित महसूस कर रहे थे और कहने लगे “मुझे फाइव स्टार में भी इतना अच्छा भोजन नहीं मिलता जितना आज स्वदेशी कार्यालय में मिला है,यह सात्विकता और प्रेम का परिणाम है।”
वे 3 घंटे तक कार्यालय रुके और सब का मन जीत ग॔ए।