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कल दिल्ली के सिंघु बॉर्डर पर किसानों के बीच में, स्वदेशी की टीम।
कल अपने कृषि वैज्ञानिक प्रोफेसर वेद प्रकाश लोहाच व आर्थिक मामलों के जानकार सीए राजीव सिंह जी के साथ दिल्ली के सिंघु बॉर्डर जाना हुआ। सामान्य किसान क्या सोच रहा है, और वार्ता क्यों नहीं सिरे चढ़ रही, यह जानने की इच्छा थी।
सारा घूमने के बाद दो तीन किसानों से चर्चा भी हुई। लंगर चल रहे थे, छोटे-मोटे भाषण चल रहे थे, क्योंकि शाम हो गई थी, संख्या कम थी। एक जगह डीजे पर युवक नाच रहे थे। कुछ खरीदा खरादी में भी लगे थे। मेले जैसा दृश्य था।
किंतु ध्यान में आया की अलग-अलग यूनियनों के नेता है कोई एक सर्वमान्य नेता, इस आंदोलन का नहीं है। जो वार्ता के समय पर बड़ा निर्णय लेने की क्षमता रखता हो। कोई भी अपने आप को नरम नहीं दिखाना चाहता, इसलिए सरकार का यह प्रस्ताव भी कि कानून, डेढ़ साल तक स्थगित करके एक कमेटी बना देते हैं, को मानने की हिम्मत नहीं कर रहे। यद्यपि अनेक नेता अंदर से इसे काफी ठीक मानते हैं।
32 यूनियन है। पुन्नू गुरदासपुर जिले का लीडर है तो बलबीर रजेवाल संगरूर का और जगमीत पटियाला का व जोगन्द्र उगराह बठिंडा के। सब अपने को दूसरे से बढ़कर मानते हैं। अनेक वामपंथी विचार के हैं। जो यह सोचते हैं कि यह झगड़ा जितना लंबा चले उतना अच्छा, कोई रास्ता क्यों निकालना? बस इसी चक्कर में ना सुप्रीम कोर्ट की वे मान रहे हैं ना सरकार के कोई भी प्रस्ताव!
खैर!जो भी होगा अंततः सत्य की विजय होगी! विश्वास रखिये! मेरा अनुमान है 26 को हिंसा नहीं होगी, यद्यपि बड़ी संख्या मे ट्रैक्टर आयेंगे।