उसी सेमिनार को संबोधित करते हुए, भगवती जी, कश्मीरी लाल जी के साथ मैं स्वयं।
स्वदेशी विचार ही दुनिया को उबरने का मार्ग है।
आज बड़ा संयोग हुआ। इधर जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय दिल्ली (जे एन यू) व उधर जकार्ता यूनिवर्सिटी इंडोनेशिया के निमंत्रण पर प्रोफेसर भगवती प्रकाश जी, कश्मीरी लाल जी व मैं उनके एक वेबिनार को संबोधित करने ऑनलाइन गए। और विषय भी था ‘स्वदेशी और ग्लोबलाइजेशन।’
हम देखकर हैरान थे कि इस मुस्लिम देश के 200 से अधिक विद्यार्थी, प्रोफेसर जुड़े थे, यह सुनने के लिए कि भारत के स्वदेशी जागरण मंच के अधिकारी इंडोनेशिया में स्वदेशी के आंदोलन के बारे में क्या कहते हैं?स्वभाविक है हम तीनों ने उन्हें भारत में चल रहे स्वदेशी आंदोलन के बारे में बताया। “स्वदेशी वसुधैव कुटुंबकम का मार्ग है, जो विश्व को परिवार समझता है, जबकि ग्लोबलाइजेशन यह विश्व को बाजार समझने का मार्ग है। स्वदेशी पर्यावरण की रक्षा करता है, ग्लोबलाइजेशन विनाश। स्वदेशी रोजगार व समृद्धि बढ़ाता है, तो ग्लोबलाइजेशन धन का केंद्रीकरण और बेरोजगारी बढ़ाता है।”
यह सब विचार सुनकर इंडोनेशिया के लोग प्रभावित थे। वे वहां भी स्वदेशी आंदोलन खड़ा करने की चर्चा करने को उत्सुक थे। उनके प्रश्न उत्तर से तो यही लगा।
इंडोनेशिया भी, भारत की तरह, चीनी सस्ते माल के आयात से परेशान है। जब हमने उन्हें स्वदेशी आंदोलन ‘स्वदेशी स्वीकार-चाइनीज बहिष्कार’ के बारे में बताया तो वह भी अब निश्चित है, इसी मार्ग पर चलेंगे। क्योंकि वे भी व्यापार घाटे और बेरोजगारी से परेशान हैं।
जो भी हो स्वदेशी आंदोलन वैश्विक आवश्यकता बन रहा है और दुनिया को, जो तीसरे विकल्प का मार्ग, ठेंगड़ी जी बता कर गए हैं, वह स्वीकार होने लगा है। जय स्वदेशी- जय भारत!
~सतीश कुमार
तालमेल का कार्य प्रो:गौतम झा(JNU) व योगेश्वर तोमर जी ने किया