आन्ध्र में पत्रकारवार्ता का फ़ाईल फ़ोटो
वाह क्या बात है? अमेरिका की इंडोनेशिया एंबेसी (90%मुस्लिम आबादी का देश)में लगी मां सरस्वती की 16 फुट ऊंची प्रतिमा…जय हो! किंतु यहां तो केंद्रीय विद्यालयों में सरस्वती वंदना प्रार्थना के समय गाई जाती है,इसी पर ही सुप्रीम कोर्ट में रिट लग जाती है!ये है धर्मनिरपेक्षता..?किंतु यह उषा काल से पूर्व का बच गया अंधेरा है!इस समय पर सारे भारत के सामाजिक धार्मिक राजनीतिक परिदृश्य से धर्मनिरपेक्षता का कलंक लगभग समाप्त हो गया है।आज आप देखेंगे कि कांग्रेस पार्टी से लेकर द्रविड़ियन रजनीकांत तक सब मंदिरों की, स्प्रिचुअल पॉलिटिक्स की बात कर रहे हैं!700 करोड़ की हज सब्सिडी समाप्त की गई, किसी ने उफ तक नहीं की!अन्यथा यही कांग्रेस और धर्मनिरपेक्ष दल तूफान खड़ा कर देते थे।एक भगवाधारी सन्यासी के सबसे बड़े प्रदेश का मुख्यमंत्री बन जाने पर वो सब चुप हैं जो 4-5 साल पहले तक भगवा आतंकवाद की बातें करते थे!यानी भारतीय राजनीति से धर्मनिरपेक्षता अब विदा हो गई है अब राष्ट्रवादी राजनीति ही चलेगी…
इसी प्रकार आर्थिक क्षेत्र में भी पश्चिमी मॉडल और एफडीआई आधारित विकास इसकी समाप्ति की वेला आने वाली है!कोई बड़ी बात नहीं अगर 2019 के चुनाव में रोजगार और स्वदेशी ही मुद्दा बने और जैसे गुजरात में राहुल गांधी मंदिर मंदिर जा रहे थे ऐसे ही इस चुनाव में सभी पार्टियां “रोजगार-रोजगार स्वदेशी-स्वदेशी” इसी के ही नारे लगाती मिलें!
मोदी प्रणीत भाजपा ने अगर झूठी धर्मनिरपेक्षता का कलंक मिटाने में सफलता पायी है तो ठेंगडी जी द्वारा प्रारम्भ स्वदेशी जा:मंच को जूठे पश्चिमी आर्थिक मॉडल को हटा रोजगार युक्त स्वदेशी मॉडल को भारत में स्थापित करने में भी सफलता अवश्यम्भावी है…. विश्वास है?